श्रीकांत सक्सेना।
बचपन में रामलीलाओं में सांदीपनी मुनि के आश्रम को दिखाकर लोकरंजन के लिए एक रोचक कथानक प्रस्तुत किया जाता था।
ऋषि अपने शिष्य को शालिगराम महाराज को नदी में स्नान कराने के लिए भेजते हैं।
बालक शिष्य को नदी के किनारे लगे जामुन के पेड़ पर लटकती जामुनों को देखकर मुँह में पानी आ जाता है,पर वह जामुनों तक पहुँच नहीं पाता।
अंतत: वह शालिगराम जी को जामुन के पेड़ पर लटकी जामुनों पर निशाना लगाता है बदले में उसे खूब सारी जामुनें खाने को मिलती हैं।
थोड़ी देर बाद उसका उत्साह और बढ़ता है और वह एक बार फिर सालिगराम को ज़ोर से पेड़ की ओर उछालता है, दुर्भाग्य से इस बार सालिगराम पेड़ से न टकराकर सीधे नदी में जा गिरते हैं।
गहरे पानी से सालिगराम को ढूंढ पाना असंभव जानकर आख़िर शिष्य को एक उपाय सूझता है।
वह सालिगराम की जगह एक मोटी सी जामुन रख देता है।
पूजा के वक्त ऋषि जब सालिगराम को नहलाते हैं तो उनके हाथों में जामुन की गुठली उनके हाथ में रह जाती है।
क्रोधित होकर जब वे शिष्य से इसके बारे में पूछते हैं तो शिष्य कहता है-
पुनि पुनि चंदन,पुनि पुनि पानी
ठाकुर जी गल गए हम कहा जानी
माने आप जो रोज़-रोज़ सालिगराम को चंदन लगाते हैं पानी से नहलाते हैं तो आख़िरकार सालिगराम जी गल गए ,हम इस बारे में क्या जानें।
अब उन्हीं ऋषि सांदीपनि की धरती उज्जैन के बाबा महाकाल की मूर्ति के क्षरण को लेकर चिंतनीय रिपोर्ट टीवी पर आ रही हैं।
महाकाल की पत्थर की मूर्ति का लगातार क्षरणों रहा है, निरंतर जल,दुग्धादि से स्नान कराते-कराते तथा सभी प्रकार की सामग्री चढ़ाते और श्रद्धा से स्पर्श करते रहने से भगवान महाकाल की मूर्ति घिसने लगी है।
पुरातत्ववेत्ताओं के अनुसार शीघ्र ही मूर्ति को निरंतर नहलाने और स्पर्श करने की प्रथा को रोकना चाहिए वरना “पत्थर” के क्षरण की गति तेज़ होना शुरु हो जाएगी।
अब पुरातत्ववेत्ता तो पत्थर के क्षरण की समस्या मानकर “पत्थर” कह बैठा किंतु महाकाल के भक्तों के लिए तो महाकाल साक्षात जीवित ईश्वर स्वरूप हैं।
कहा जाता है कि महाकाल के असंख्य भक्तों में से एक औरंगज़ेब भी था, जो महाकाल के मन्दिर को हर साल बहुत मोटी रक़म इस उम्मीद से देता था कि वहाँ महाकाल के सामने उसके नाम का घी का दीपक जलता रहेगा और बदले में महाकाल उसे लंबी उम्र और लंबी अवधि तक हिंदुस्तान पर राज्य करने का वरदान दे देंगे।
ये औरंगज़ेब को मिले महाकाल के वरदान का नतीज़ा है या कुछ और ये बात या तो महाकाल जानें या फिर औरंगज़ेब लेकिन इतिहास साक्षी है कि औरंगज़ेब ने लगभग नवासी साल की हयात पाई और उसने पूरे उनचास सालों तक हिंदुस्तान पर शासन किया।
शुभमस्तु।
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