मल्हार मीडिया ब्यूरो।
यूजीसी के नए नियम 'उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता विनियम, 2026' को लेकर लखनऊ, पटना से लेकर दिल्ली तक प्रदर्शन व्यापक स्तर पर शुरु हो गए हैं। राजधानी दिल्ली में यूजीसी मुख्यालय के बाहर सामान्य वर्ग के प्रतिनिधि विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। हालांकि प्रदर्शनकारियों को अंदर नहीं जाने दिया गया है। वहीं इस मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट में एक और याचिका दाखिल की गई
दिल्ली में विरोध प्रदर्शन
यूजीसी द्वारा 13 जनवरी 2026 को जारी किए गए नियमों को लेकर यूजीसी के दिल्ली स्थित हेडक्वाटर के बाहर मंगलवार सुबह से सामान्य वर्ग के लोग विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। वहां पर बड़ी संख्या में पुलिस फोर्स को तैनात किया है। प्रदर्शनकारियों को अंदर प्रवेश करने से रोकने के लिए पुलिस ने मुख्य द्वार पर बैरिकेड लगा दिए हैं। किसी भी प्रदर्शनकारी को यूजीसी ऑफिस के अंदर जाने की इजाजत नहीं है।
जमीनी स्तर से लेकर सोशल मीडिया तक नए नियमों का विरोध
यूजीसी के नए नियमों के खिलाफ दिल्ली के साथ-साथ उत्तर प्रदेश और बिहार में भी विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में आज सुबह से ही बड़ी संख्या में सामान्य वर्ग के छात्र सड़क पर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। वहीं बिहार में कई जगहों से प्रदर्शन की जानकारी सामने आई है। जमीन से लेकर सोशल मीडिया तक यूजीसी के इन नए नियमों के खिलाफ 'वॉर' छिड़ गया है। सामान्य वर्ग की मांग है कि इस एक्ट को वापस लिया जाए या इसमें संशोधन किया जाए।
सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल
यूजीसी द्वारा बनाए गए नए नियमों के खिलाफ मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में एक और याचिका दाखिल की गई है। याचिका में आरोप लगाया गया कि ये नियम सामान्य वर्ग के लिए भेदभावपूर्ण हैं। वकील विनीत जिंदल ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की है। उन्होंने कहा कि ये नियम सामान्य वर्ग के लिए भेदभावपूर्ण हैं और उनके मौलिक अधिकारों का हनन करने वाले हैं। याचिका में सुप्रीम कोर्ट से मांग की गई है कि यूजीसी रेगुलेशंस-2026 के प्रावधान 3(सी) को लागू करने पर रोक लगाई जाए। इसके अलावा, 2026 के नियमों के अंतर्गत बनाई गई व्यवस्था सभी जाति के व्यक्तियों के लिए लागू हो।
इससे पहले भी सुप्रीम कोर्ट में सामान्य वर्ग के साथ भेदभाव का आरोप लगाते हुए नियम 3(सी) को चुनौती दी गई। एक जनहित याचिका (पीआईएल) में यूजीसी के नए नियम के नियम 3(सी) को मनमाना, भेदभावपूर्ण और असंवैधानिक बताते हुए रद्द करने की मांग की गई।
सरकार का जवाब
सूत्रों के मुताबिक, केंद्र सरकार जल्द ही यूजीसी के इन नए नियमों के बारे में लोगों विस्तृत जानकारी देगी। सूत्र का कहना है कि सत्तापक्ष यह मान रही है कि बजट सत्र से पहले विपक्ष इस मुद्दे पर सामान्य वर्ग को गुमराह कर रहा है। सरकार का यह भी कहना है कि नए नियमों का किसी भी तरह का दुरुपयोग बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
बरेली के नगर मजिस्ट्रेट का UGC के नए नियमों के विरोध में इस्तीफा
बरेली के नगर मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने सरकारी नीतियों विशेषकर विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के नए नियमों पर नाराजगी जताते हुए सोमवार को सेवा से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने मंगलवार को बताया 'मैंने कल ही अपना इस्तीफा जारी कर दिया है। कल जब सुनियोजित साजिश विफल हो गई। DM सर के ऑफिस में फोन पर किसी ने आपत्तिजनक वार्ता की वो मैंने सुन लिया था। मैंने अपने वकील को बताया की मुझे बंधक बनाने की बात हो रही है आप प्रेस को बता दें। तब आनन-फानन में मुझे जाने दिया गया। मुझे अन्य आरोप में सस्पेंड करने की सुनियोजित साजिश थी।'
यूजीसी के नए नियमों पर क्यों मचा बवाल?
सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की गई याचिका में आरोप लगाया गया है कि यूजीसी का यह नया नियम उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने के नाम पर कुछ वर्गों (खासकर सामान्य वर्ग) के खिलाफ भेदभाव को बढ़ावा देता है और इससे कुछ समूहों को शिक्षा से बाहर किया जा सकता है। याचिका में कहा गया कि नियम 3(सी) संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार), अनुच्छेद 19 (अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता) और अनुच्छेद 21 (व्यक्तिगत स्वतंत्रता) का उल्लंघन करता है। साथ ही, यह यूजीसी अधिनियम, 1956 के प्रावधानों के विपरीत है और उच्च शिक्षा में समान अवसर सुनिश्चित करने के मूल उद्देश्य को नुकसान पहुंचाता है।
क्या हैं यूजीसी के नए नियम?
नए नियम के तहत उच्च शिक्षण संस्थानों में जाति आधारित भेदभाव को रोकने के लिए 13 जनवरी, 2026 को प्रकाशित यूजीसी के नियमों में विशेष समितियों, हेल्पलाइन और निगरानी दलों की स्थापना अनिवार्य की गई है ताकि विशेष रूप से अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के छात्रों की शिकायतों का समाधान किया जा सके।
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