मल्हार मीडिया भोपाल।
मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने समान नागरिक संहिता (UCC) को लेकर भाजपा और केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि संविधान सभी को अपने धर्म का पालन करने का अधिकार देता है और एक धर्म के कानून दूसरे धर्म के लोगों पर लागू करना गलत है।
भोपाल में ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन ( AIMIM) प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी पार्टी के कार्यक्रम में शामिल होने भोपाल पहुंचे। सेंट्रल लाइब्रेरी परिसर में आयोजित कार्यक्रम से पहले ओवैसी ने मीडिया से बातचीत की। उन्होंने समान नागरिक संहिता (यूसीसी) का विरोध करते हुए कहा कि संविधान नागरिकों को अपने धर्म का पालन करने की स्वतंत्रता देता है। उन्होंने भाजपा के सहयोगी दलों से भी कहा कि यदि उनके भाजपा से वैचारिक मतभेद हैं तो उन्हें यूसीसी का विरोध करना चाहिए।
ओवैसी ने कहा कि यदि टीडीएफ, जेडी(यू), कुमारस्वामी, चिराग पासवान और जयंत चौधरी पूरी तरह भाजपा की विचारधारा के साथ खड़े हैं तो यह अलग बात है। लेकिन अगर इन दलों के भाजपा से अभी भी कुछ मतभेद हैं, तो उन्हें समान नागरिक संहिता का विरोध करना चाहिए।
संविधान ने अपने धर्म का पालन करने का दिया अधिकार
ओवैसी ने संविधान का हवाला देते हुए कहा कि बाबासाहेब आंबेडकर द्वारा बनाए गए संविधान में अनुच्छेद 14, 25, 26 और 29 के तहत नागरिकों को समानता और अपने धर्म का पालन करने का अधिकार दिया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि उत्तराखंड से शुरू होकर गुजरात और असम तक पहुंचा यूसीसी गैर-हिंदुओं पर हिंदू उत्तराधिकार कानून, हिंदू विवाह कानून और हिंदू दत्तक एवं भरण-पोषण से जुड़े कानून लागू करने की कोशिश है। ओवैसी ने इसे गलत बताते हुए कहा कि एक धर्म के कानून को दूसरे धर्म के लोगों पर लागू करना समानता और धार्मिक स्वतंत्रता के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि इसी वजह से उनकी पार्टी समान नागरिक संहिता का विरोध कर रही है। बता दें भाजपा शासित राज्यों में यूसीसी को लागू करने की प्रक्रिया तेज कर दी हैं। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा है कि भाजपा-एनडीए शासित 21 राज्यों में 2029 से पहले यूसीसी लागू किया जाएगा। इस पर ओवैसी पहले भी सवाल उठा चुके हैं और आरोप लगाया है कि यूसीसी का उद्देश्य समानता नहीं, बल्कि मुसलमानों को निशाना बनाना है। वहीं, मध्य प्रदेश में यूसीसी को विधानसभा की मंजूरी मिल चुकी हैं।
सरकार का उद्देश्य अल्पसंख्याकों के अधिकार खत्म करना
ओवैसी ने आरोप लगाया कि यूसीसी देश के करीब 18 करोड़ मुसलमानों को निशाना बनाने के लिए लाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इसके जरिए संविधान के अनुच्छेद 26 और 29 से मिले अधिकारों को कमजोर करने की कोशिश की जा रही है। ओवैसी ने कहा कि सरकार का उद्देश्य अल्पसंख्यकों के अधिकार खत्म करना है। उन्होंने मध्यप्रदेश में आदिवासी आबादी का जिक्र करते हुए कहा कि प्रदेश में मुस्लिमों से ज्यादा आदिवासी हैं, लेकिन उन्हें यूसीसी के दायरे से बाहर रखा गया है।
उत्तराखंड जैसा यूसीसी लागू करने का आरोप
ओवैसी ने कहा कि उत्तराखंड और दूसरे राज्यों में जिस तरह का UCC लागू किया गया है, उसी मॉडल को मध्यप्रदेश में भी लागू किया जा रहा है। उन्होंने इसे धार्मिक स्वतंत्रता और अल्पसंख्यकों के अधिकारों से जोड़ते हुए सरकार की नीति पर सवाल उठाए। यूसीसी को लेकर ओवैसी पहले भी आरोप लगा चुके हैं कि यह समानता के बजाय मुसलमानों को निशाना बनाने की कोशिश है।
मस्जिद-कब्रिस्तानों को नुकसान पहुंचाने का आरोप
AIMIM प्रमुख ने भाजपा शासित राज्यों में धार्मिक स्थलों को लेकर भी सरकारों पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि जहां-जहां भाजपा की सरकार है, वहां मस्जिदों और कब्रिस्तानों को नुकसान पहुंचाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि विकास और अन्य कार्रवाइयों के नाम पर अल्पसंख्यक समुदाय के धार्मिक स्थलों को निशाना बनाया जा रहा है।
यूपी में कितनी सीटों पर लड़ेंगे, अभी तय नहीं
ओवैसी ने उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को लेकर भी पार्टी की रणनीति पर बात की। उन्होंने कहा कि AIMIM यूपी में कितनी सीटों पर चुनाव लड़ेगी, यह फिलहाल तय नहीं है। उनका कहना था कि भाजपा की तीसरी बार सरकार नहीं बननी चाहिए और इसके लिए उनकी पार्टी सभी दलों के साथ गठबंधन के लिए तैयार है। उन्होंने कांग्रेस पर भी निशाना साधते हुए कहा कि जब कांग्रेस के साथ कुछ भी गलत होता है तो AIMIM को 'बी टीम' बताया जाता है। ओवैसी ने कहा कि उनकी पार्टी अपने राजनीतिक फैसले खुद लेती है और किसी के दबाव में काम नहीं करती।
राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद लागू होगा यूसीसी
मध्यप्रदेश विधानसभा से 21 जुलाई को पारित समान नागरिक संहिता (यूसीसी) विधेयक को राज्यपाल की मंजूरी मिल चुकी है। राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने के बाद ही इसके प्रावधान प्रदेश में प्रभावी हो सकेंगे। इसके बाद विधि एवं विधायी विभाग राजपत्र में अधिसूचना जारी करेगा। यूसीसी में विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और लिव-इन संबंधों के लिए समान कानूनी व्यवस्था का प्रावधान है। इसमें एक से अधिक विवाह पर रोक, विवाह का अनिवार्य पंजीयन और लिव-इन संबंधों के पंजीयन की व्यवस्था की गई है। महिला और पुरुष को उत्तराधिकार में समान अधिकार देने का भी प्रावधान है। अनुसूचित जनजातियों को इसके दायरे से बाहर रखा गया है।
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