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आपकी जिन्दगी की खूबसूरती केवल इतनी नहीं कि आप कितने खुश हैं

वीथिका            Jul 11, 2022


शिवकुमार शर्मा।
मैं कई बार सोचता हूँ कि हम आज के दौर में परिवार को लेकर इतने असुरक्षित क्यों होते जा रहें हैं?

हमारे समाज के वर्तमान दौर में परिवारों की जो स्थिति हो गयी है वह अवश्य चिन्तनीय है।

घरों में महिलाएं हों या पुरुष सभी आज शिकायतों का पिटारा लेकर एक दूसरे के खिलाफ सुनाने को तैयार बैठे हैं मगर अपनी गलती या कमियों को कोई सुनने को राजी नहीं हैं।

भावनात्मक रूप से एक दूसरे से जुड़े रहने और रिश्तों की मजबूती के लिये हमें सुनाने की ही नहीं अपितु सुनने की आदत भी डालनी चाहिए थी जो आज देखने को भी नहीं मिल रही है।

चलो ये भी मान लिया जाये कि मैं गलत और आप सही हैं मगर परिवार की शान्ति बनाये रखने के लिये बेवजह सुन लेना भी कोई अपराध नहीं है बजाय इसके कि अपने को सही साबित करने के चक्कर में पूरे परिवार को ही अशांत बनाकर रख दिया जाये।

कई मौकों पर आज घरों में लोग सच को भी नहीं मानने को तैयार नहीं होते हैं और व्यक्तिगत लाभ हानि की तलाश करने लगते हैं और इसी उहापौह में आप तो जीत जाने की खुशियाँ मनाते हो लेकिन परिवार हार के दुख में डूब जाता है।

आप ये महसूस करते हैं कि मैं तो जीत गया और मैं तो फायदे में हूँ जबकि ये नहीं जानते हों कि अपनों को हराकर आप कभी नहीं जीत सकते, अपनों से हारकर ही आप उन्हें जीत सकते हैं।

जिन परिवारों में टूटे रिश्ते को जोड़ना और रूठे को मनाना जानते हैं, ऐसे परिवार ही हमेशा खुशहाल और विकास के रास्ते पर अग्रसर होते हैं।

परिवारों में आज हर कोई अधिकार की बात कर रहा है, मगर अफ़सोस कोई कर्तव्य की बात नहीं कर रहा।

घरों में लोग कभी यह स्वीकार नहीं करना चाहते कि अमुक कार्य में मेरी गलती थी जिसमें मै अपनी जिम्मेदारी को नहीं निभा सका।

आज हर परिवार में लोग एक दूसरे के खिलाफ शिकायतों की लम्बी चौड़ी लिस्ट लिए मिल जायेंगे और किसी से भी कुछ देर तक बात करने के बाद शिकायतों का पाठ शुरू कर देते हैं।

जबकि ये तो समझ लिया होता कि आपकी समस्याओं का निराकरण भी आपके परिवार के लोगों के पास ही है आम आदमी के पास नहीं है।

यहाँ ये भी सच है कि शिकायतें करने वाले लोग कभी कर्मठ व कर्तव्यनिष्ठ नहीं हो सकते हैं आज इंसान अगर अपने कर्तव्य पर ध्यान देता तो शिकायतों की नौबत नहीं आती।

आज इंसान को परिवार में ये सोचने जरुरत है कि मैंने अपने कर्तव्य का पालन किया है या नहीं अगर नहीं तो परिवार से अच्छे लाभ न मिलने पर मन में कुंठित न होइए।

आज के दौर की भौतिक दुनियां की जिंदगी में भी श्रीमद गीता का ये उपदेश सच नजर आता है कि जैसा कर्म करोगे वैसा ही फल मिलेगा आज नहीं मिला तो काल अवश्य मिलेगा अब चाहे परिवार हो, समाज हो या चाहे कहीं सगठन।

आपकी व्यक्तिगत जिन्दगी की खूबसूरती केवल इतनी नहीं कि आप कितने खुश हैं, अपितु ये है कि आपसे आपके संबधित लोग कितने खुश हैं।

आज हर परिवार के लोगों की खुशियाँ एक दूसरे की खुशियों से जुडी हुईं है। अतः परिवार की खुशियों की भागीदारी में अपना भी योगदान दें तो आप भी प्रसन्न अवश्य रहेंगे।

लेखक राजपत्रित अधिकारी हैं।

 



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