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19 सितंबर तक चिदंबरम रहेंगे तिहाड़ में

समाचार            Sep 05, 2019


मल्हार मीडिया ब्यूरो।
देश के पूर्व केंद्रीय मंत्री और कांग्रेस के कद्दावर नेता पी चिदंबरम को तिहाड़ जेल भेजा गया है। उन्हें आईएनएक्स मीडिया केस में कोर्ट ने 19 सितंबर तक भेजने का आदेश दिया है।

आपको बता दें कि गैर जमानती वारंट जारी किये जाने के बाद चिदंबरम को सीबीआई की हिरासत में भेजा गया था। कांग्रेस नेता की 15 दिनों की सीबीआई हिरासत की अवधि आज समाप्त हो रही थी। विशेष अदालत ने उन्हें पांच चरणों में 15 दिनों के लिए सीबीआई हिरासत में भेजा था । उन्हें 21 अगस्त की रात को गिरफ्तार किया गया था।

चिदंबरम को विशेष न्यायाधीश अजय कुमार कुहाड़ की अदालत में पेश किया गया । कुहाड़ ने उच्चतम न्यायालय के आदेश का संज्ञान लेते हुए पूर्व वित्त मंत्री को दो दिन की सीबीआई हिरासत में भेज दिया था । उच्चतम न्यायालय के आदेश में कहा गया था कि कांग्रेस नेता पांच सितंबर तक सीबीआई की हिरासत में रहेंगे । प्रवर्तन निदेशालय की ओर से दर्ज धन शोधन के एक मामले में दिल्ली उच्च न्यायालय के 20 अगस्त के फैसले के खिलाफ चिदंबरम की अपील पर शीर्ष अदालत ने सुनवाई की और अग्रिम जमानत नामंजूर किये जाने को दी जाने वाली उनकी चुनौती को खारिज कर दिया ।


शीर्ष अदालत के फैसले के कुछ ही घंटे बाद एक अन्य विशेष अदालत ने एयरसेल मैक्सिस मामले में चिदंबरम और उनके बेटे कार्ति को अग्रिम जमानत दे दी । आईएनएक्स मामले में सीबीआई की ओर से सोलिसीटर जनरल तुषार मेहता अदालत में मामला रख रहे हैं जबकि चिदंरबम की पैरवी वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल कर रहे हैं ।

कार्यवाही के दौरान, मेहता ने न्यायाधीश को प्रवर्तन निदेशालय मामले में उच्चतम न्यायालय के आदेश के परिणाम और सीबीआई मामले में अपनी याचिकाओं को वापस लेने के बारे में सूचित किया । सीबीआई ने अदालत से कहा कि चिदंबरम को न्यायिक हिरासत में भेजा जा सकता है । चूंकि वह एक ताकतवर नेता हैं इसलिए उन्हें आजाद नहीं किया जाना चाहिए। सिब्बल ने सीबीआई का विरोध करते हुए कहा कि ऐसा कोई आरोप नहीं है कि चिदंबरम ने जांच को प्रभावित करने अथवा इसमें कोई बाधा उत्पन्न करने का प्रयास किया हो । उन्होंने आगे कहा कि आईएनएक्स मीडिया से संबंधित धन शोधन मामले में चिदंरबम प्रवर्तन निदेशालय की हिरासत में जाने के लिए तैयार हैं । इस मामले में शीर्ष अदालत ने चिदंबरम की याचिका गुरूवार को खारिज कर दी थी जिसमें उन्होंने दिल्ली उच्च न्यायालय के 20 अगस्त के फैसले को चुनौती दी थी । (इनपुट-भाषा)

 



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