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एक साला सफलता पर पानी फेरती आर्थिक विफलता

खरी-खरी            May 15, 2015


सिद्धार्थ शंकर गौतम 26 मई को मोदी सरकार के कार्यकाल का एक वर्ष पूर्ण होने जा रहा है। इस एक वर्ष में देश के समक्ष ऐसे कई मौके आए जब हर देशवासी का मस्तक गर्व से ऊंचा हो गया। मसलन, हिंसाग्रस्त यमन से भारतियों समेत विदेशी नागरिकों को सकुशल वापस लाना, भूकंपग्रस्त नेपाल को बड़े भाई की हैसियत के तहत दिल खोल कर मदद करना, विदेश नीति के तहत पडोसी देशों से दोस्ती और सौहार्दपूर्ण व्यवहार रखना, विकसित देशों के समक्ष भारत की छवि मजबूत करना आदि। निःसंदेह नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्रित्व काल के इस एक वर्ष ने सफलता के नए आयाम छुए हैं किन्तु आर्थिक मोर्चे पर सरकार की विफलता इस एक वर्ष की सफलता पर थोड़ा पानी फेरती है। हालांकि १० वर्षों के कांग्रेसी शासनकाल की विफलता और लूट-खसोट के ज़ख्म एक साल में तो कदापि नहीं भरे जा सकते, फिर भी मोदी सरकार को आर्थिक मोर्चे पर अधिक सुदृढ़ता से काम करने की आवश्यकता है। राजनीतिक लिहाज से देखें तो भाजपा इस दौरान विश्व की सबसे बड़ी पॉलिटिकल पार्टी बनने में कामयाब रही वहीं दिल्ली के सदमे को छोड़ अन्य राज्यों के विधानसभा चुनाव में पार्टी ने खोया कम-पाया ज़्यादा है। अब जबकि इस माह मोदी सरकार का एक वर्ष पूर्णता की ओर है, सरकर ने इस दौरान किए जाने वाले कार्यक्रम का प्‍लान जारी किया है। इसके तहत देशभर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अन्‍य मंत्री १०० रैलियां करेंगे। वहीं जमीनी स्‍तर पर लोगों तक पहुंचने की तैयारी में भाजपा २६ मई से एक जून तक सप्ताह भर चलने वाले 'जन कल्याण पर्व' का आयोजन करेगी। इस दौरान मोदी सरकार के एक वर्ष के 'अच्छे दिनों' का जनता के बीच ब्यौरा दिया जाएगा। 'जन कल्याण पर्व' में मंत्री, पार्टी सांसद और वरिष्ठ पदाधिकारी देशभर में जाकर सरकार की विभिन्न नीतियों और गरीबों एवं किसानों के लिए उठाए गए कदमों को प्रस्तुत करेंगे। इस दौरान सरकार यह भी सुनिश्चित करेगी कि जाति और धर्म का भेदभाव किए बिना समाज के हर वर्ग तक पहुंचना उसका लक्ष्य है। हाल ही में मोदी सरकार की एक बड़ी उपलब्धि की ओर आपका ध्यान आकर्षित करना चाहूंगा। हमारे देश में संसद सत्रों का बेबजह ह्रास बड़ा तकलीफ देय होता था किन्तु हाल ही में समाप्त हुए बजट सत्र में शुरुआती गलतियों के बाद मोदी सरकार कामयाब रही। इस बजट सत्र के दोनों सदनों से रिकॉर्ड 24 विधेयक पारित कराने में सफलता के साथ-साथ पिछले पांच-छह वर्षो में सबसे ज्यादा काम का रिकॉर्ड भी बना। हालांकि सदन के सुचारू रूप से चलने का एक कारण विपक्ष का साथ भी था मगर देखा जाए तो यह मोदी सरकार के नियंत्रण और विनम्र निमंत्रण के चलते ही संभव हुआ। इस बजट सत्र में सरकार की सबसे बड़ी उपलब्धि रही बांग्लादेश के साथ सीमा समझौता- जिसे दोनों सदनों ने सर्वसम्मति से पारित किया। आर्थिक रफ्तार की दिशा में सरकार कई अहम विधेयक पारित कराने में सफल रही जबकि सत्र के अंतिम दिन काला धन का विधेयक भी पारित हो गया। इसके साथ ही जीएसटी और भूमि अधिग्रहण बिल को अगले सत्र में पारित कराने का मार्ग भी प्रशस्त हुआ। सरकार की उपलब्धि को इससे समझा जा सकता है कि पिछली मई से अब तक दोनों सदनों ने 47 विधेयक पारित करवाए। साथ ही लोकसभा की 90 तो राज्यसभा की 87 बैठकें हुईं। यह पिछले एक दशक में सबसे ज्यादा हैं। लोकसभा के लगभग सात घंटे तो राज्यसभा के 18 घंटे से ज्यादा हंगामे की भेंट चढ़े। इसके बावजूद लोकसभा में 117 फीसद तो राज्यसभा में 101 फीसद ज्यादा काम हुआ। कांग्रेस की दृष्टि से देखा जाए तो सदन का यह सत्र उसके लिए भी अच्छा रहा। लंबी छुट्टी मनाकर लौटे कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी इस दफा बजट सत्र में जितना दिखे, उतना पिछले एक दशक में कभी नहीं दिखे। सरकार इसे भी अपना सकारात्मक पक्ष मानकर जनता को प्रभावित करना चाहती है। हालांकि एक अखबार की खबर के अनुसार कांग्रेस मोदी सरकार के एक साल पूरे होने के जश्न को फीका करने के लिए 'किताबी बम' फोड़ने की तैयारी में हैं। मोदी सरकार को उसके वादों पर घेरने में जुटी कांग्रेस 'प्रामिसेस एंड फेल्योर' शीर्षक से बुकलेट जारी करेगी। गौरतलब है कि सरकार को घेरने के लिए कांग्रेस पूर्व में भी ऐसा प्रयोग कर चुकी है। पार्टी ने राजग सरकार के छह महीने पूरे होने पर भी 'छह महीने पार यू-टर्न सरकार' नाम से बुकलेट जारी की थी। दरअसल, कांग्रेस की कोशिश मोदी सरकार पर वादे नहीं निभाने के अपने आरोपों को लिखित दस्तावेज के रूप में जनता तक ले जाने की है। इसके अलावा कांग्रेस देश व राज्यों की राजधानियों में प्रेस वार्ताओं के जरिए सरकार के खिलाफ अभियान छेड़ेगी। उसकी कोशिश किसानों से जुड़े मामलों, देश की सुरक्षा, आर्थिक मोर्चे पर सरकार की प्रगति और बढ़ती महंगाई के मुद्दे पर सरकार को सवालों के घेरे में खड़ा करने की है। कांग्रेस संसदीय दल की बैठक में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी सरकार को उपलब्धि शून्य बता चुकी हैं। ऐसे में कांग्रेस की आक्रामकता कहीं न कहीं सरकार को असहज कर रही होगी। आने वाले कुछ दिन मूल्यांकन के हैं और सभी अपने-अपने हिसाब से सरकार को नंबर देंगे। अब गेंद जनता के पाले में है कि वह किसे कितने नंबर देती है? वह सरकार की हकीकत को महत्व देती है या विपक्ष के पर्दाफाश को?


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