
डॉ. प्रकाश हिंदुस्तानी।
सरकार को लगता है कि या तो सारी अक्कल केवल IAS और IPS के पास ही है या यह लॉबी सरकार को फिर 'चला' रही है? वरना CAPF Bill के जरिये सशस्त्र बलों की लगभग सभी टॉप पोस्ट पर IPS को बैठाने की क्या तुक?
सीमाओं की, एयरपोर्ट्स की रक्षा करें ये लोग, दंगा हो तो ये जाएं, नक्सलियों से लड़ने ये जाएं और की पोस्ट दे दी जाए IPS लोगों को। CRPF, BSF, ITBP, CISF और SSB के लोगों के पास प्रमोशन के मौके पहले ही कम हैं।
यहां खटनेवाले अफसर जानते हैं कि उनके अर्द्ध सैनिक बल के जवान सशस्त्र सेना से कम नहीं हैं।
देश के 10 लाख से ज्यादा सशस्त्र बलों के जवानों और अधिकारियों के भविष्य से सीधे खिलवाड़ की कोशिश की जा रही है, वह भी सुप्रीम कोर्ट के निर्देश की अवहेलना करके। विपक्ष का आरोप है कि सरकार इस बिल के जरिए सुप्रीम कोर्ट के एक महत्वपूर्ण फैसले को पलटने की कोशिश कर रही है।
इन बलों में वरिष्ठ पदों (खासकर IG, ADG, DG) पर IPS अधिकारी बाहर से आकर काम करते रहे हैं। CAPF के अपने कैडर अधिकारी (जो सीधे इन बलों में भर्ती होते हैं) लंबे समय से मांग कर रहे हैं कि उन्हें भी टॉप पदों तक पहुंचने का पूरा मौका मिले। जो पूरी तरह नहीं मिल रहा।
बिल के प्रमुख प्रावधान हैं कि इन बालों के IG रैंक पर कुल पदों का 50% IPS अधिकारियों द्वारा डेपुटेशन से भरा जाएगा। Additional DG रैंक पर कम से कम 67% पद IPS के लिए होंगे और Special DG और DG रैंक के सभी पद IPS अधिकारियों द्वारा ही भरे जाएंगे।
सरकार को नोटिफिकेशन के जरिए नियम बनाने और कुछ मामलों में कोर्ट के फैसलों को ओवरराइड करने जैसी शक्तियां मिल गई हैं, जिससे विवाद बढ़ गया है।
पहले ये सब executive guidelines पर चलता था, जिसे अदालत में चुनौती दी जा सकती थी। 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने CAPF कैडर अधिकारियों की याचिका पर IPS डेपुटेशन को कम करने और कैडर रिव्यू करने का आदेश दिया था लेकिन सरकार है जो IPS डेपुटेशन को स्थायी बनाना चाहती है।
कुछ विशेषज्ञ कहते हैं कि यह IPS अधिकारियों के करियर को सुरक्षित करने के लिए CAPF कैडर को नुकसान पहुंचाया जा रहा है।यह सब आसान लगता है, पर है नहीं। जो कर ले, वही पीर !
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