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दिल्ली हाईकोर्ट का मप्र सरकार को झटका, वकील को बकाया भुगतान के आदेश दिए

खास खबर            Sep 01, 2026


मल्हार मीडिया ब्यूरो।

दिल्ली उच्च न्यायालय के जस्टिस सचिन दत्ता की पीठ ने यह तल्ख टिप्पणी करते हुए मध्य प्रदेश सरकार को बड़ा झटका दिया है।

हाईकोर्ट ने एमपी सरकार को राज्य के पूर्व महाधिवक्ता और वरिष्ठ अधिवक्ता अनूप जॉर्ज चौधरी को ₹78.65 लाख का बकाया भुगतान 9% वार्षिक ब्याज (वर्ष 2021 से) के साथ करने का निर्देश दिया है।

अदालत ने एमपी सरकार के रुख पर सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि कानूनी सेवाएं लेने के बाद राज्य भुगतान से इनकार नहीं कर सकता। जस्टिस सचिन दत्ता ने टिप्पणी की कि किसी वकील को अपनी फीस वसूलने के लिए सालों तक याचिका लड़नी पड़े, यह व्यवस्था और राज्य की गरिमा के लिए चिंताजनक है।

वरिष्ठ अधिवक्ता अनूप जॉर्ज चौधरी ने सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ के सामने मध्य प्रदेश सरकार और मध्य प्रदेश हाउसिंग बोर्ड का पक्ष रखा था। मामला इंदौर डेवलपमेंट अथॉरिटी बनाम मनोहर लाल (Indore Development Authority v. Manoharlal) और भूमि अधिग्रहण कानून (Land Acquisition Act, 2013) की धारा 24(2) की संवैधानिक व्याख्या से जुड़ा हुआ था।

सरकार की दलील चौधरी की नियुक्ति की अधिकारिक फाइल उपलब्ध नहीं सुनवाई के दौरान मध्य प्रदेश सरकार ने दलील दी कि चौधरी की नियुक्ति की कोई आधिकारिक फाइल उपलब्ध नहीं है और उनकी फीस का दावा बहुत अधिक है।

इस पर दिल्ली हाई कोर्ट ने फटकार लगाते हुए सुप्रीम कोर्ट की आधिकारिक कॉज़ लिस्ट (Cause List) और राज्य के तत्कालीन मुख्य सचिव (एसआर मोहंती) के बयानों को रिकॉर्ड पर लिया।

कोर्ट ने साफ कहा कि जब राज्य ने चौधरी को सुप्रीम कोर्ट में खड़ा किया और उनकी बहस का फायदा उठाया, तो अब रिकॉर्ड का बहाना बनाकर पैसे देने से मना नहीं किया जा सकता।

कोर्ट ने तकनीकी और दोहरी बिलिंग को हटाते हुए ₹6.05 लाख प्रति सुनवाई के हिसाब से 13 दिनों की फीस यानी कुल ₹78,65,000 की राशि तुरंत 9 फीसदी ब्याज के साथ चुकता करने का फरमान जारी कर दिया।

 



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