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जनगणना फार्मेट पर कांग्रेस ने उठाए सवाल, ड्रॉप-डाउन सूची की मांग की

राजनीति            Aug 25, 2026


 कांग्रेस ने जनगणना के दौरान जाति गणना कराने के लिए ड्राप डाउन लिस्ट नहीं देने और व्यक्ति की ओर से बताई गई जाति को ही लिख देने के तरीके को रद्द कर नए सिरे से जाति गणना प्रश्नवाली का कालम तैयार करने की मांग की है।

लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी और राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने प्रधानमंत्री को संयुक्त पत्र लिखकर साफ कहा है कि राजनीतिक दलों तथा विशेषज्ञों से मशविरा कर जाति गणना के लिए नई प्रश्नावली बनाई जानी चाहिए।

तेलंगाना और बिहार में हुए जाति सर्वेक्षण के माडल को अपनाने का पीएम से आग्रह करते हुए विपक्षी नेताओं ने जाति गणना के लिए ड्राप डाउन सूची कालम में रखने की पैराकारी की है।

कांग्रेस ने जाति गणना में ड्रॉप-डाउन सूची की मांग की

कांग्रेस के संचार महासचिव जयराम रमेश ने प्रेस कांफ्रेंस में राहुल गांधी और खरगे की प्रधानमंत्री को 20 अगस्त को लिखी चिठठी जारी करते हुए कहा कि कांग्रेस नेतृत्व की ओर से जाति गणना के संदर्भ में पीएम को यह तीसरा पत्र भेजा गया है पर किसी पत्र का जवाब नहीं मिला है। फिर भी हम उम्मीद करते हैं कि दोनों विपक्षी नेताओं के जाति गणना पर रचनात्मक सुझावों का संज्ञान लेकर जरूरी बदलाव के लिए सरकार कदम उठाएगी।

उन्होंने कहा कि अभी लद्दाख, जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के बर्फीले इलाकों में ही जनगणना शुरू हुई और देश के बाकी हिस्सों में फरवरी 2027 में जनगणना होगी।

ऐसे में ड्राप डाउन प्रश्नावली तैयार करने का अब भी समय है पर सरकार की नीयत नहीं दिखती। खरगे और राहुल ने पत्र में पीएम मोदी से कहा है कि सामाजिक न्याय की नीतियां सही आंकड़ों के बिना पूरी नहीं हो सकती।

अलग-अलग जातियों की संख्या और उनकी सामाजिक-आर्थिक स्थिति का सही आकलन तभी संभव है जब जातियों की गिनती सही तरीके से हो।लेकिन सरकार ने जाति की जानकारी दर्ज करने के लिए जनगणना में ओपन एंडेड प्रश्न का भ्रामक तरीका चुना है जिसमें प्रत्येक व्यक्ति अपनी जाति का जो नाम बताएगा वही दर्ज कर लिया जाएगा।

जबकि भारत में एक ही जाति अलग-अलग क्षेत्रों में विभिन्न नामों, उपजातियों और भाषाओं से जानी जाति है। ऐसे में एक ही जाति के लोग जनगणना में अलग-अलग इलाकों में अलग-अलग नामों से दर्ज होंगे तो एक जाति हजारों में बंट जाएगी। इससे जाति जनगणना से हासिल पूरा आंकड़ा अनुपयोगी हो जाएगा।

बिहार-तेलंगाना मॉडल अपनाने का आग्रह किया गया

राहुल और खरगे ने कहा है कि जब किसी समुदाय की सही संख्या दर्ज नहीं होगी तो उसकी स्थिति का आकलन गलत होगा। इसका नुकसान पिछड़े, अति पिछड़े तथा अन्य वंचित समुदायों को होगा।शिक्षा, रोजगार, योजनाओं और सामाजिक न्याय से जुड़े फैसले भी प्रभावित होंगे।

सबसे महत्वपूर्ण ओबीसी की आबादी कितनी है यह भी पता नहीं चलेगा क्योंकि जनगणना में पिछड़ा वर्ग शब्द तक शामिल नहीं है। ड्राप डाउन सूची को इसका समाधान बताते हुए दोनों कांग्रेस नेताओं ने बिहार तथा तेलंगाना माडल की प्रश्नावली पत्र के साथ पीएम को भेजी है।

जयराम रमेश ने कहा कि जनगणना में ड्राप डाउन सूची नहीं होने से बिल्कुल साफ है कि प्रधानमंत्री की जाति आधारित जनगणना कराने की सच्ची मंशा नहीं है क्योंकि मोदी सरकार 2021 में सुप्रीम कोर्ट में दाखिल अपने हलफनामे से पलट गई है और इसका पालन नहीं कर रही है।

केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय द्वारा दाखिल इस हलफनामे की प्रति साझा करते हुए जयराम ने कहा कि इसमें सरकार ने साफ कहा था कि अगर जाति आधारित जनगणना करानी है तो पहले जातियों की एक ड्राप डाउन सूची तैयार करनी होगी।

 



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