मल्हार मीडिया।
मध्यप्रदेश के नीमच जिले के मनासा में गिलियन बार्रे सिंड्रोम जीबीएस के कारण 2 बच्चों की मौत हो चुकी है और शनिवार तक 15 से अधिक संक्रमित मिले हैं हालांकि स्वास्थ्य विभाग जीबीएस के 14 संक्रमित मिलने की पुष्टि कर इनमें से 2 की मौत की बात कह रहा है।
जीबीएस के कारण मनासा में नागरिकों में डर का माहौल है। स्वास्थ्य विभाग का अमला अलर्ट मोड पर हैं। वहीं जीबीएस के संक्रमण की जानकारी मिलने के बाद एमपी के उप मुख्यमंत्री व स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ल ने भी मनासा पहुंचकर स्वास्थ्य विभाग के प्रयासों की समीक्षा की और इलाज के लिए बेहतर इंतजाम करने पर जोर दिया।
जिला प्रशासन अलर्ट मोड पर
जिला मुख्यालय से लगभग 32 किलोमीटर दूर मनासा में जीबीएस के संक्रमण के मामले बढ़ने से जिला प्रशासन अलर्ट मोड पर हैं। जीबीएस के कारण नगर के राम नगर के सोनू पुत्र पूरण सहगल आयु 15 वर्ष की 11 जनवरी और सिपाही मोहल्ला के कृतिकेश उर्फ केशव पुत्र अर्जुन देतवाल आयु 6.5 वर्ष की 12 जनवरी को मौत हो चुकी है। इन मौतों के बाद से जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग बेहद अलर्ट मोड पर हैं लेकिन इसके पहले तक स्वास्थ्य विभाग इसे सामान्य बीमारी मान रहा था।
नगर में जीबीएस से 2 बच्चों की मौत के बाद अब तक 15 से अधिक संक्रमित मिल चुके हैं। हालांकि स्वास्थ्य विभाग 14 लोगों में जीबीएस के संक्रमण की पुष्टि कर रहा है, जिनमें से 2 की मौत हो चुकी है।
जीबीएस के संक्रमण की जानकारी सामने आने के बाद मनासा में डब्ल्यूएचओ, स्वास्थ्य विभाग भोपाल और शासकीय मेडिकल कालेज नीमच की टीमें सक्रिय है। उज्जैन संभागायुक्त आशीष सिंह व कलेक्टर हिमांशु चंद्रा भी 2 दिन से मनासा में हैं और तैयारियों की मॉनीटरिंग कर रहे हैं। शनिवार को एमपी के उप मुख्यमंत्री व स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ल मनासा पहुंचे और उन्होंने लगभग आधे घंटे से अधिक समय तक स्वास्थ्य विभाग की तैयारियों की समीक्षा के बाद मृतकों के स्वजनों से चर्चा की। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग को सचेत होकर सर्वे करने और मनासा में डेडिकेटेड वार्ड बनाने के निर्देश दिए हैं।
क्या है जीबीएस?
चिकित्सकीय भाषा में जीबीएस को गिलियन बार्रे सिंड्रोम कहा जाता है। जीबीएस ऑटो इम्युन बीमारी है। शुरुआत में सामान्य सर्दी-जुकाम व बुखार के लक्षण सामने आते हैं लेकिन 5 से 7 दिन बाद यह इम्युन सिस्टम पर अटैक करता है। पैरों से शुरुआत होकर यह आंतों और नसों तक पहुंचता है। पैरों में अकड़न के साथ हाथ की अंगुलियां कड़क हो जाती है। कई लोग इस लकवा जैसा मानते हैं लेकिन समय पर इलाज के अभाव में जीबीएस से मृत्यु तक हो जाती है।
मनासा में डेडिकेटेड वार्ड, आईवीआईजी इंजेक्शन का पर्याप्त स्टॉक
उप मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ल ने मीडिया से चर्चा में कहा कि सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मनासा में जीबीएस के लिए डेडिकेटेड वार्ड बनाया जा रहा है, जिसमें वेंटीलेटर लगाए जा रहे हैं। इसकी क्षमता 10 बेड की होगी। जीबीएस की स्थिति को देखते हुए 3 विशेषज्ञ डाक्टरों की नियुक्ति कर दी गई है। 100 आईवीआईजी इंजेक्शन उपलब्ध करा दिए गए हैं, 250 जल्द भेजे जाएंगे। अन्य स्थानों पर इलाजरत मरीजों का इलाज एमपी सरकार कराएगी। राहत राशि की घोषणा मुख्यमंत्री करेंगे। जीबीएस के कारणों की स्थिति सैंपलों की जांच रिपोर्ट के बाद स्पष्ट होगी।
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