मल्हार मीडिया ब्यूरो।
संगीत शिक्षक भर्ती-2024 से जुड़े मामलों में मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने अंतरिम आदेशों का कथित रूप से पालन नहीं किए जाने पर सख्त रुख अपनाया है। न्यायालय ने लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) के संबंधित अधिकारियों के खिलाफ अवमानना नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। मामले में DPI अधिकारी कामना आचार्य का नाम सामने आया है। अवमानना याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता प्रवीण वर्मा और डॉ. ज्योति वर्मा ने न्यायालय के समक्ष पक्ष रखा।
समकक्ष योग्यता वाले अभ्यर्थियों को विकल्प देने का था आदेश
याचिकाकर्ताओं के मुताबिक, हाई कोर्ट ने 19 जून, 22 जून, 23 जून और 9 जुलाई 2026 को अलग-अलग प्रकरणों की सुनवाई के दौरान अंतरिम आदेश जारी किए थे। इन आदेशों में प्रयाग संगीत समिति, प्रयागराज की 'प्रभाकर' सहित समकक्ष योग्यता रखने वाले अभ्यर्थियों को भर्ती प्रक्रिया में विकल्प भरने की अनुमति देने के निर्देश दिए गए थे।
साथ ही न्यायालय ने स्पष्ट किया था कि ऐसे अभ्यर्थियों की अंतिम नियुक्ति हाई कोर्ट के अंतिम निर्णय के अधीन रहेगी।
आदेश के बावजूद पालन नहीं करने का आरोप
याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि न्यायालय के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद लोक शिक्षण संचालनालय की ओर से आदेशों का पूर्ण रूप से पालन नहीं किया गया। इसी को लेकर अवमानना याचिका दायर की गई, जिस पर हाई कोर्ट ने संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी किया है।न्यायालय ने अधिकारियों से यह भी स्पष्ट करने को कहा है कि अंतरिम आदेशों का पालन क्यों नहीं किया गया।
'प्रभाकर' को समकक्ष मान्यता के समर्थन में कई दस्तावेज
अभ्यर्थियों की ओर से प्रयाग संगीत समिति के 'प्रभाकर' को संगीत स्नातक के समकक्ष मान्यता दिए जाने के समर्थन में विभिन्न न्यायिक फैसलों और सरकारी आदेशों का हवाला दिया गया है।
याचिकाकर्ताओं ने सर्वोच्च न्यायालय, केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (कैट) नई दिल्ली, दिल्ली हाई कोर्ट और पटना हाई कोर्ट के फैसलों के साथ मध्य प्रदेश शासन के 19 अक्टूबर 1974 के आदेश समेत कई दस्तावेज न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किए हैं।
समान योग्यता पर अलग-अलग मापदंड अपनाने का आरोप
अभ्यर्थियों का कहना है कि समान अथवा समकक्ष योग्यता रखने वाले उम्मीदवारों के लिए भर्ती प्रक्रिया में अलग-अलग मापदंड अपनाए गए। उनका तर्क है कि यदि 'प्रभाकर' को समकक्ष योग्यता के रूप में मान्यता प्राप्त है, तो ऐसे अभ्यर्थियों को भर्ती प्रक्रिया में भाग लेने का समान अवसर मिलना चाहिए।
अब हाई कोर्ट द्वारा जारी अवमानना नोटिस के बाद DPI अधिकारियों को आदेशों के पालन और कथित चूक को लेकर अपना पक्ष स्पष्ट करना होगा। मामले की आगे की सुनवाई में अधिकारियों के जवाब के आधार पर न्यायालय अगला रुख तय करेगा।
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