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सरकार और किसानों की बातचीत शुरू, मंत्रालय में बैठक

मध्यप्रदेश            Jul 29, 2026


मल्हार मीडिया भोपाल।

मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में तीसरे दिन भी जारी किसान आंदोलन के बीच मध्य प्रदेश सरकार ने समाधान की दिशा में बड़ा कदम उठाया है।

मुख्यमंत्री के निर्देश पर गठित मंत्रियों की समिति ने बुधवार शाम मंत्रालय में किसान संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ वार्ता शुरू कर दी। बैठक में किसानों की प्रमुख मांगों पर चर्चा की जा रही है। मुख्यमंत्री के भोपाल पहुंचने के बाद इस बैठक में लिए गए निर्णयों पर अंतिम मुहर लगने की संभावना है।

सरकार की ओर से कृषि मंत्री एदल सिंह कंसाना, सहकारिता मंत्री विश्वास सारंग और पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण राज्य मंत्री कृष्णा गौर किसान प्रतिनिधियों के साथ चर्चा कर रहे हैं।

इन किसान संगठनों के प्रतिनिधि बैठक में शामिल

मंत्रालय में आयोजित बैठक में भारतीय किसान यूनियन, किसान स्वराज संगठन, किसान महापंचायत, राष्ट्रीय किसान मजदूर संघ, राष्ट्रीय किसान मोर्चा, आम किसान यूनियन, किसान सेवा संघ, किसान आक्रोश मोर्चा, क्रांतिकारी किसान मजदूर संघ, क्रांतिकारी किसान आर्मी संगठन, जन सर्वोदय किसान संगठन और भारतीय किसान संघ सहित विभिन्न किसान संगठनों के प्रतिनिधि मौजूद हैं।

सरकार को दी चेतावनी

बैठक से पहले भारतीय किसान मजदूर महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष शिवकुमार शर्मा (कक्काजी) ने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि किसानों की मांगों पर तत्काल निर्णय लिया जाए। उन्होंने कहा कि सरकार के पास समाधान के लिए केवल आज का समय है, अन्यथा आंदोलन को प्रदेशव्यापी रूप दिया जाएगा।

उन्होंने स्पष्ट कहा कि मूंग की शत-प्रतिशत खरीदी की घोषणा हर हाल में होनी चाहिए। साथ ही खाद वितरण में लागू ई-टोकन व्यवस्था में सुधार की मांग करते हुए कहा कि सर्वर बार-बार डाउन होने से किसानों को टोकन नहीं मिल रहे हैं और खाद वितरण बाधित हो रहा है।

होगा प्रदेशव्यापी आंदोलन

शिवकुमार शर्मा ने कहा कि यदि सरकार ने जल्द निर्णय नहीं लिया तो आंदोलन का अगला चरण शुरू होगा। इसके तहत सबसे पहले चाकघाट में चक्काजाम किया जाएगा और इसके बाद प्रदेश के अन्य स्थानों पर भी आंदोलन का विस्तार होगा। उनका दावा है कि पूरे मध्य प्रदेश से किसानों के समर्थन के संदेश मिल रहे हैं और बड़ी संख्या में किसान आंदोलन में शामिल होने को तैयार हैं।

'किसान जाग चुका है'

उन्होंने कहा कि आंदोलन में 90 प्रतिशत से अधिक युवा किसान शामिल हैं, जो अपने अधिकारों के प्रति जागरूक हैं। शर्मा ने आरोप लगाया कि मूंग की खेती पर किसानों की लागत अधिक आती है, लेकिन सरकारी खरीदी की सीमा बहुत कम निर्धारित की गई है। उनके अनुसार, जहां एक एकड़ में 7 से 8 क्विंटल तक उत्पादन होता है, वहीं खरीदी मात्र लगभग डेढ़ क्विंटल प्रति एकड़ के हिसाब से की जा रही है।

उन्होंने यह भी कहा कि केंद्र और राज्य दोनों जगह एक ही दल की सरकार है और केंद्र के कृषि मंत्री भी मध्य प्रदेश से हैं। ऐसे में 'कृषक कल्याण वर्ष' मनाने के बावजूद किसानों की समस्याओं का समाधान न होना गंभीर चिंता का विषय है।

 



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