डॉ. प्रकाश हिंदुस्तानी।
दशकों पहले मैं कभी सुनील दत्त साहब से मिला था, तब एक पार्षद उनके साथ था, वह बाबा सिद्दीकी था। मुझे वह दत्त साब का मामूली छर्रा लगा था पर,...
प्रकाश भटनागर।वह दूरदर्शन के देशव्यापी प्रसारण का आरम्भिक दौर था। प्रसारण में रह-रहकर तकनीकी खामी आ जाती थी। तब स्क्रीन पर लिखा आता, ‘रुकावट के लिए खेद है।’ उस समय का एक बच्चा याद...