मल्हार मीडिया भोपाल।
देशभर के उच्च स्तरीय शैक्षणिक संस्थानों में मुखिया के रूप में नियुक्तियों और इन संस्थानों की ओर से दी जाने वाली मानद उपाधियों पर विवादों के बीच कुछ सूचनाएं सुकून देने वाली भी होती हैं। उन्हीं में से एक खबर रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय, जबलपुर से आई है।
जबलपुर स्थित यह विश्वविद्यालय 21 जून को अपने दीक्षांत समारोह में श्री विजयदत्त श्रीधर को डी. लिट. की मानद उपाधि देने जा रहा है। साहित्य और पत्रकारिता के मुझ जैसे असंख्य विद्यार्थियों को यह जानकारी उल्लास से भर देती है।
जिन्हें भी श्रीधर जी का सानिध्य मिला है, शायद ही उन्हें यह लगा हो कि वे पत्रकारिता के शोध और उसके इतिहास-लेखन के एक पुरोधा के समीप आए हैं। इसी अति विनम्र भाव के साथ श्रीयुत श्रीधर ने भोपाल में माधवराव सप्रे स्मृति समाचार पत्र संग्रहालय एवं शोध संस्थान की स्थापना की है, तो असंख्य पुस्तकों के साथ उन्होंने ‘भारतीय पत्रकारिता कोश’ (दो खण्ड) और ‘समग्र भारतीय पत्रकारिता’ (तीन खण्ड) जैसे शोध प्रबंधात्मक ग्रंथों की रचना की है। इन दोनों कार्यों में श्रीधर जी की वय के चार दशक से भी अधिक का समय लगा।
विजयदत्त श्रीधर को पत्रकारिता और साहित्य में योगदान के लिए पहले भी विभिन्न सम्मान दिए जा चुके हैं। इनमें सप्रे संग्रहालय की स्थापना और पत्रकारिता सम्बंधी शोधपूर्ण लेखन के लिए भारत सरकार की ओर से दिया गया नागरिक सम्मान ‘पद्म श्री’ प्रमुख है।
अन्य सम्मानों में महर्षि वेदव्यास राष्ट्रीय सम्मान, माधवराव सप्रे राष्ट्रीय रचनात्मक सम्मान, भारतेन्दु हरिश्चन्द्र पुरस्कार भी शामिल है। हिन्दी साहित्य सम्मेलन, प्रयाग ने श्रीधर जी को अपनी सर्वोच्च उपाधि ‘साहित्य वाचस्पति’ से विभूषित किया है।
अब रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय, जबलपुर की अकादमिक समितियों ने उन्हें डी.लिट. की जो मानद उपाधि देने का निर्णय किया है, उसे विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के हाथों प्रदान किया जाएगा। आयोजन में मध्यप्रदेश के राज्यपाल मंगुभाई पटेल, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और राज्य के उच्च शिक्षा मंत्री इन्दर सिंह परमार भी उपस्थित रहेंगे।
विश्वविद्यालय के कुलगुरु (कुलपति) प्रोफेसर राजेश कुमार वर्मा आयोजन के सूत्रधार होंगे।
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