मल्हार मीडिया भोपाल।
हिन्दी लेखिका संघ, म.प्र. भोपाल द्वारा सोमवार को राजधानी के भोपाल शिवाजी नगर स्थित विश्व संवाद केन्द्र के सभागार में ‘पर्यावरण’ विषय पर काव्य गोष्ठी आयोजित की गई। कार्यक्रम में 50 साहित्यकार बहनों ने पर्यावरण संरक्षण, अपनी दैनिक जीवनचर्या में सकारात्मक परिवर्तन तथा अधिकाधिक वृक्षारोपण का संकल्प लिया।
गोष्ठी में शहर की प्रबुद्ध लेखिकाओं एवं कवयित्रियों ने अपनी रचनाओं के माध्यम से प्रकृति संरक्षण, घटते वन क्षेत्र, पर्यावरणीय असंतुलन और मानवीय संवेदनाओं को प्रभावशाली ढंग से अभिव्यक्त किया। कविताओं में प्रकृति के प्रति मनुष्य के दायित्व तथा आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित और हरित भविष्य सुनिश्चित करने का संदेश प्रमुखता से उभरकर सामने आया।
संस्था की अध्यक्ष डॉ. साधना गंगराड़े ने स्वागत उद्बोधन में पर्यावरण संरक्षण को समय की सबसे बड़ी आवश्यकता बताते हुए साहित्यकारों से जनजागरण में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया। उन्होंने सभी से अपनी आयु के बराबर वृक्ष आगामी दस वर्षों में लगाने का संकल्प लेने की अपील भी की।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहीं पर्यावरणविद् सीमा वर्मा ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण के लिए केवल चिंतन नहीं, बल्कि जीवनशैली में परिवर्तन आवश्यक है। उन्होंने विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन बनाए रखने तथा एक वृक्ष के बदले अनेक वृक्ष लगाने की आवश्यकता पर बल दिया।
मुख्य अतिथि वरिष्ठ पर्यावरणविद् श्रीराम माहेश्वरी ने कहा कि भारतीय संस्कृति और वाङ्मय में प्रकृति एवं पर्यावरण संरक्षण को विशेष महत्व दिया गया है। उन्होंने वृक्षों और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण को मानव अस्तित्व के लिए अनिवार्य बताया।
विशिष्ट अतिथि एवं सेवानिवृत्त आईएफएस अधिकारी श्री जगदीश चन्द्रा ने वन एवं वन्यजीवन से जुड़े अपने अनुभव साझा किए तथा अपनी कविता ‘अगर वृक्ष बोल पाता’ का पाठ कर श्रोताओं को भावविभोर कर दिया।
काव्य गोष्ठी में नीलिमा रंजन, मनोरमा श्रीवास्तव, डॉ. प्रियंका श्रीवास्तव, सुधा दुबे, कल्पना विजयवर्गीय, वंदना त्रिपाठी, डॉ. सीमा अग्रवाल, बिंदु त्रिपाठी, आशा सक्सेना, डॉ. रेखा भटनागर, कमल चंद्रा, बलजीत सलूजा, नीता श्रीवास्तव ‘श्रद्धा’, साधना शुक्ला, वंदना गुप्ता, किरण खोड़के, मृदुल त्यागी, मधुलता शर्मा, चित्रा चतुर्वेदी तथा सरोजलता सोनी सहित अनेक कवयित्रियों ने पर्यावरण विषयक रचनाओं का प्रभावशाली पाठ किया। उनकी कविताओं में प्रकृति के प्रति संवेदना, पर्यावरणीय संकटों की चिंता और संरक्षण का संदेश मुखर रूप से अभिव्यक्त हुआ।
कार्यक्रम का संचालन वंदना अतुल जोशी ने किया। सरस्वती वंदना कुसुम श्रीवास्तव द्वारा प्रस्तुत की गई तथा आभार प्रदर्शन मृदुल त्यागी ने किया। अंत में उपस्थित साहित्यकार बहनों ने पर्यावरण संरक्षण, वृक्षारोपण और प्रकृति-अनुकूल जीवनशैली अपनाने की सामूहिक शपथ लेकर कार्यक्रम को सार्थक दिशा प्रदान की।
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