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शाह का साठ साल का शिगूफ़ा...! निशाने पर मार्गदर्शक...?

खरी-खरी            Nov 20, 2015


sriprakash-dixitश्रीप्रकाश दीक्षित बिहार में करारी शिकस्त के तुरंत बाद मध्यप्रदेश पधारे भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने फरमाया कि 60 साल कि उम्र के बाद नेताओं को राजनीति छोड़ कर समाजसेवा मे लग जाना चाहिए। इसके लिए उन्होने नानाजी देशमुख की मिसाल दी। वे चित्रकूट में नानाजी देशमुख द्वारा प्रारम्भ किए गए दीनदयाल शोध संस्थान के कार्यक्रम में शरीक हुये और नानाजी को श्रद्धांजलि देने उनके निवास सियाराम कुटीर भी गए। जैसा कि नेताओं के विवादास्पद बयानों के साथ होता है शाहजी के इस बयान पर भी पार्टी ने कहा कि उसे तोड़ मरोड़ कर पेश किया गया है और उनके कहने का मतलब यह नहीं था। जाहिर है अमित शाह के निशाने पर मार्गदर्शक मण्डल में खपाए गए लालकृष्ण आडवाणी,मुरली मनोहर जोशी, यशवंत सिन्हा और शांता कुमार जैसे दिग्गज नेता हैं, जो सत्तर-अस्सी बरस कि उम्र पार कर चुके हैं। बिहार की पराजय पर इन नेताओं के तीखे और सख्त बयान से तिलमिलाए अमित शाह को नानाजी तो याद आए पर बुढ़ापा आराम से काटने के लिए मोदी जी द्वारा राजभवनों मे बैठाए गए कल्याण सिंह, केसरीनाथ त्रिपाठी औरकप्तान सिंह सोलकी को भूल गए। वे काँग्रेस द्वारा मध्यप्रदेश के राजभवन मे बैठाए गए अस्सी पार के रामनरेश यादव को भी भूल गए जो व्यापम घोटाले मे आरोपी बनाए जाने के बाद मोदी जी की कृपा [?] से राज्यपाल बने हुए हैं..! वे 65-70 साल के बुजुर्ग नौकरशाह नृपेन्द्र मिश्र को भी भूल गए जिन्हें अपना प्रमुख सचिव बनाने के लिए मोदीजी ने नियम तक बदल डाला है। मुझे याद आ रहा है नानाजी देशमुख का साठ साल में राजनीति से रिटायर होने वाला बयान जो उन्होंने 1978 में दिया था जब केंद्र में जनता सरकार थी। तब 85 पार के मोरारजी देसाई प्रधानमंत्री,75 पार के चरण सिंह गृह और जगजीवनराम रक्षामंत्री थे। बहुत सोच समझ कर दिया गया यह बयान अटल बिहारी वाजपेयी की संभावनाओं को बेहतर बनाने की गरज से दिया गया था जो तब विदेश मंत्री थे। राजीव गांधी बेहद कम उम्र में प्रधानमंत्री बन गए थे पर क्या हुआ..? वे बेहद अपरिपक्व राजनेता साबित हुए जिसकी परिणति बोफोर्स जैसे घोटाले और उनके दुखद निधन के रूप में हुई। इसके मुक़ाबले नरसिंहराव के कार्यकाल की याद करें जिनके द्वारा शुरू किए आर्थिक सुधार आज तक याद किए जाते हैं। लंबे कार्यकाल के रिकार्ड और देश के सबसे काबिल मुख्यमंत्री माने जाने वाले ज्योति बसु भी 80 बरस के बाद पद से हटे थे। अस्सी पर के अच्युतनंदन पूरे पाँच साल केरल मे मुख्यमंत्री रहे और अब नेता प्रतिपक्ष हैं। दूर क्यों जाएँ अपने एमपी में बाबूलाल गौर भी अस्सी पार के हैं और दीगर मंत्रियों से अधिक ऊर्जावान, सहज और सरल हैं।


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