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राम राम जपना, श्रीराम जी के यहाँ ही बेईमानी होगी तो भरोसा कहाँ टिकेगा?

खरी-खरी            Jun 23, 2026


 

डॉ. प्रकाश हिन्दुस्तानी ।

मैंने भी करोड़ों लोगों की तरह श्री अयोध्या जी में बनने वाले श्रीराम मंदिर के लिए चंदा दिया था। आपमें से भी कई मित्रों ने दिया होगा।

श्री राम मंदिर जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को शुरू से अब तक करीब 3,500 करोड़ रुपये से अधिक दान मिल चुका है। निर्माण पर करीब आधा धन खर्च हुआ,बाकी रखरखाव और अन्य कार्यों पर। ट्रस्ट के सभी लोगों पर मुझे तो पूरा ट्रस्ट है, लेकिन बार-बार जो आरोप लगते हैं, वे करोड़ों लोगों को क्लेश पहुंचा रहे हैं।

ट्रस्ट नियमित ऑडिट कराता है, आयकर रिटर्न दाखिल करता है। 80G टैक्स छूट प्राप्त करता है। भारतीय भक्त सोना, चांदी, हीरे, नकद, चेक, ऑनलाइन तरीके से दान देते हैं। विदेश से भी दान आता है। ब्याज से भी कमाई होती है। कुल मिलाकर ट्रस्ट के पास धन की कोई कमी नहीं है।

लेकिन अब कई लोगों पर अंगुली उठाई जा रही है। आरोपों की सुई जिन नामों पर है ,उनमें शामिल हैं चम्पत राय , अनिल मिश्र, गोपाल राव और चम्पत राय के वहां चालक रामशंकर यादव उर्फ़ टिन्नू यादव का नाम शिकायतों में नामित व्यक्ति के रूप में उल्लेख हुआ। कुछ याचिकाएं और शिकायतें भी सामने आईं।

ट्रस्ट के महासचिव प्रोफ़ेसर चम्पत राय जी लंबे समय से राम मंदिर आंदोलन और विहिप से जुड़े रहे हैं। वे छात्र जीवन से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े रहे, पूर्णकालिक संगठन कार्य में सक्रिय हो गए। राम मंदिर आंदोलन के प्रमुख चेहरों में उनकी पहचान बनी। इसी कारण मंदिर ट्रस्ट को लेकर उठे विवादों में उनका नाम भी लगातार चर्चा में रहा है।

एक बात स्पष्ट करना जरूरी है कि अब तक उपलब्ध सार्वजनिक जानकारी के आधार पर चंपत राय या ट्रस्ट के किसी शीर्ष पदाधिकारी के खिलाफ भ्रष्टाचार सिद्ध नहीं हुआ है। आरोप, जांच और दोषसिद्धि — ये तीन अलग-अलग चरण हैं।

लेकिन आम आदमी पार्टी के नेता खासकर संजय सिंह , समय-समय पर जो आरोप लगाते रहे हैं, वे करोड़ों लोगों के मन में संशय पैसा कर रहे हैं। राम मंदिर निर्माण के शुरुआती वर्षों में सबसे अधिक चर्चा भूमि खरीद को लेकर हुई।

विपक्षी दलों और कुछ सामाजिक कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि अयोध्या के बाग बिजैसी क्षेत्र में खरीदी गई लगभग 1.208 हेक्टेयर जमीन की कीमत बहुत कम समय में कई गुना बढ़ा कर ट्रस्ट को बेची गई। आरोप यह भी है कि इस प्रक्रिया में आर्थिक अनियमितता या धन शोधन जैसे तत्व हो सकते हैं।

ट्रस्ट ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया। उसका कहना था कि जमीन का मूल्य वर्तमान बाजार दरों के अनुसार तय हुआ, भुगतान बैंकिंग व्यवस्था के जरिए हुआ और पूरी प्रक्रिया वैधानिक थी। ट्रस्ट ने इसे राजनीतिक विवाद बताया। उस मामले में अब तक कोई ऐसा सार्वजनिक निष्कर्ष सामने नहीं आया जिसमें भ्रष्टाचार सिद्ध हुआ हो।

2026 अब फिर नया विवाद मंदिर को मिलने वाले दान और चढ़ावे को लेकर सामने आया है। चम्पत राय पर कथित तौर पर निगरानी, जानकारी छिपाने या कार्रवाई न करने से जुड़े आरोप लगाए गए; उन्होंने सार्वजनिक रूप से आरोपों से इनकार किया है।

ट्रस्टी अनिल मिश्र से दान गिनती और प्रक्रियाओं को लेकर पूछताछ की खबरें आईं। ग्वाल राव का नाम भी शिकायतों में नाम आया; जांच के दायरे में प्रक्रियात्मक भूमिका पर सवाल उठे।

राम मंदिर में प्रतिदिन लाखों रुपये का चढ़ावा आने की बात कही जाती है। मीडिया रिपोर्टों और राजनीतिक आरोपों में यह दावा किया गया कि दान राशि, नकदी, सोना-चांदी की ईंटों, आभूषणों और अन्य मूल्यवान वस्तुओं के प्रबंधन में अनियमितता हो सकती है।

विभिन्न मंचों पर अलग-अलग राशि के दावे किए गए—कुछ आरोपों में यह आंकड़ा कुछ करोड़ रुपये से लेकर इससे कहीं अधिक तक बताया गया।

विपक्षी नेताओं, कुछ स्थानीय कार्यकर्ताओं और शिकायतकर्ताओं ने आरोप लगाया कि शिकायतों को पर्याप्त गंभीरता से नहीं लिया गया और एफआईआर दर्ज करने में देरी हुई। इन आरोपों में ट्रस्ट के कुछ पदाधिकारियों और प्रशासनिक व्यवस्था पर भी प्रश्न उठे।

इसी दौरान कुछ कर्मचारियों और ट्रस्ट से जुड़े व्यक्तियों के यहां नकदी और संपत्ति मिलने की खबरें भी सामने आईं। हालांकि इन मामलों की आधिकारिक पुष्टि और कानूनी स्थिति अलग-अलग रिपोर्टों में भिन्न रही है तथा जांच पूरी नहीं हुई है।

उ त्तर प्रदेश सरकार ने जून 2026 में तीन सदस्यीय विशेष जांच दल गठित किया। यह कदम ट्रस्ट के अनुरोध के बाद उठाया गया बताया गया। टीम में प्रशासन, पुलिस और वित्त विभाग के वरिष्ठ अधिकारी शामिल किए गए। दानपात्रों की प्रक्रिया की समीक्षा की गई, नकदी गिनती और बैंक जमा प्रणाली देखी गई, वित्तीय रिकॉर्ड और निगरानी व्यवस्था की जांच हुई, ट्रस्ट अधिकारियों, कर्मचारियों और संबंधित एजेंसियों से पूछताछ की गई।

बार बार सवाल उठता है कि चम्पत रे के ड्राइवर के पास कथित रूप से 50 करोड़ की संपत्ति कहाँ से आई? क्या ड्राइवरी करके कोई इत्ता धन कमा कसकता है?

सार्वजनिक दायरे में जो बातें आई हैं, उनमें आरोप, शिकायत, मीडिया रिपोर्ट और जांच — ये चार अलग-अलग स्तर हैं। अभी तक किसी अदालत या जांच एजेंसी ने किसी व्यक्ति के खिलाफ अंतिम रूप से भ्रष्टाचार या चोरी सिद्ध नहीं की है। हो सकता है कि कोई बेईमानी नहीं ही हुई हो, पर शक क्यों रहे?

एसआईटी को चाहिए कि वह यथासंभव जल्द से जल्द जाँच पूरी करे और ट्रस्ट की प्रतिष्ठा पर जमी धूल साफ़ करे। अगर श्रीराम जी के यहाँ ही बेईमानी होगी तो भरोसा कहाँ टिकेगा?

 

 


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