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इस कहानी के सामने आने पर ताज्जुब कैसा

खरी-खरी            Jun 23, 2026


राकेश कायस्थ।

बुद्धि विरोधी क्रांति के महाविस्फोट से 2014 में भारत में नये युग की शुरुआत हुई। भगतों ने कहा- 1947 वाली आजादी नकली थी, ये वाली असली है। अब हर तरफ तमल थिलेगा, न्यू इंडिया बनेगा और हम अमेरिका से पूछेंगे—तू क्या है बे?

देश का हर औसत बुद्धि वाला आदमी जानता था कि असल में यह चोट्टा युग की शुरुआत है। धर्म की आड़ लेकर भावनाएं भड़काकर, संस्थाओं को खरीदाकर चोरों की जमात दोनों हाथों से लगातार लूटेगी और जब भी कोई सवाल उठेगा किसी मूर्ति, किसी प्रतीक या किसी समुदाय के पीछे जाकर छिप जाएगी। इन्हें सिर्फ इतना ही आता है।

अयोध्या के महालूट की कहानी अभी खुलनी शुरू हुई कि मध्य-प्रदेश वाले मोहन जी के खानदान का कारनामा सामने आ गया। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने विकास की योजना बनवाई और जहां-जहां से सड़क निकलनी थी, वहां पूरे खानदान से सैकड़ों एकड़ जमीन खरीदवा दी। सड़क का मुआवजा बंटना शुरू होगा और रातो-रात अरबों के वारे-न्यारे हो जाएंगे। जब घोषित इतना है तो बेनामी कितनी होगी!

इस कहानी के सामने आने पर मुझे किसी तरह का ताज्जुब नहीं है। जिन्हें इस देश के बारे में ज़रा भी पता है, वो जानते हैं कि कश्मीर से कन्याकुमारी तक दोनों हाथों किस तरह की लूट मची है। क्या आपने कभी ये सोचा है कि जब इकॉनमी की बैंड बजी है, धड़ाधड़ नौकरियां जा रही हैं, आपका इंक्रीमेंट पांच परसेंट पर अंटका है, तब दिल्ली एनसीआर सहित देश के बड़े शहरों में प्रॉपर्टी के भाव सातवें आसमान पर क्यों हैं? बाज़ार में पैसा कहां से आ रहा है और कौन नोएडा से लेकर गुड़गांव तक में पांच-पांच करोड़ के फ्लैट खरीद रहा है?

लूट के लिए जिस विकास का फरेब रचा गया उसकी कहानियां अपने आप निकलकर सामने आ रही हैं। नये पुल नदी में कूदकर आत्महत्या कर रहे हैं। सड़क अपना सीना चीरकर ये बता रहे हैं कि देख लो मैं अंदर से खाली हूँ, असली माल कहीं और गया है। एथॉनल के नाम ऐसी लूट मची है कि देश के बड़े हिस्से में जल संकट पैदा होनेवाला है। असली माल कौन कमा रहा है बताने की जरूरत नहीं है।

सांप्रादायिक नारेबाजी और तेज होगी, भगवान का नाम और जोर-जोर से लिया जाएगा क्योंकि चोरों के लिए छिपने की जगह कम पड़ रही है। जब चंपत भगवान को चूना लगा रहा है तो फिर मोहन इस लूट में पीछे क्यों रहे। ये ऐसा समय है, जहां देश की आम जनता को कुछ भी हासिल नहीं होना है, सिवाय सैडिस्टिक प्लेज़र के। भक्त जब बाप-बाप करना शुरू करें तो आप ये समझ लीजिये कि आपके मोदी-मोदी करने का वक्त आ गया है।

 



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