मल्हार मीडिया ब्यूरो।
मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने निजी स्कूलों को मान्यता के लिए रजिस्टर्ड किरायानामा जमा करने की शर्त पर अंतरिम रोक लगा दी है। इससे उन स्कूल संचालकों को बड़ी राहत मिली है, जो किसी न किसी वजह से किरायानामा नहीं बनवा पा रहे थे। साथ ही हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और स्कूल शिक्षा विभाग को नोटिस जारी कर 5 हफ्ते में जवाब पेश करने का निर्देश दिया है।
याचिका में निजी स्कूल संचालकों के वकील ने दलील दी थी कि नए शैक्षणिक सत्र के लिए मान्यता नवीनीकरण की प्रक्रिया में राज्य सरकार ने रजिस्टर्ड किरायानामा की अनिवार्यता जोड़ दी है, जबकि शिक्षा के अधिकार अधिनियम में ऐसी कोई शर्त नहीं थी।
याचिकाकर्ताओं ने कहा कि इस नियम के कारण प्रदेश के हजारों स्कूल बंद होने की कगार पर पहुंच गए हैं, क्योंकि कई स्कूल कृषि भूमि या अवैध कॉलोनियों में स्थित हैं, जहां मकान मालिक रजिस्टर्ड किरायानामा देने के लिए तैयार नहीं हैं। इससे न केवल स्कूलों में कार्यरत शिक्षकों का रोजगार खतरे में आ जाएगा, बल्कि हजारों छात्रों का भविष्य भी प्रभावित हो सकता है।
चीफ जस्टिकस सुरेश कुमार कैत और जस्टिस विवेक जैन की डिवीजन बेंच ने राज्य सरकार को इस मामले में छह हफ्ते में जवाब देने का निर्देश दिया है। इसके साथ ही 7 मई 2025 तक सरकार की 6 जनवरी 2023 की अधिसूचना को स्थगित रखने का अंतरिम आदेश दिया है।
2009 के निशुल्क शिक्षा अधिकार अधिनियम के तहत 2011 में लागू किए गए नियमों में रजिस्टर्ड किरायानामा, सुरक्षा निधि और मान्यता शुल्क जैसी कोई शर्त शामिल नहीं थी।
हले नोटरी कृत किरायानामा ही मान्य होता था, जिसे स्कूल संचालक और मकान मालिक के बीच 3-5 वर्षों के लिए तैयार किया जाता था।
नई शर्त के कारण 30-40 प्रतिशत स्कूल संचालकों की मान्यता रद्द होने की नौबत आ गई है।
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मध्यप्रदेश प्राइवेट स्कूल वेलफेयर संचालक मंच की ओर से यह याचिका शैलेष तिवारी, आनंद भागवत, अरविंद मिश्रा, अनुराग भार्गव, मोनू तोमर और विकास अवस्थी द्वारा दायर की गई थी। उनकी ओर से वकील स्मिता वर्मा अरोरा ने पक्ष रखा। इस मामले में हाईकोर्ट में अगली सुनवाई 7 मई 2025 को होगी। तब तक के लिए निजी स्कूलों के मान्यता नवीनीकरण में रजिस्टर्ड किरायानामा की अनिवार्यता पर रोक रहेगी।
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