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सीजेपी का अल्टीमेटम , 48 घंटे में इस्तीफा दें ज्ञानेश, कहा मोदी के चपरासी बन जाएं

राष्ट्रीय            Sep 24, 2026


मल्हार मीडिया ब्यूरो।

कॉकरोच जनता पार्टी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। सीजेपी फाउंडर अभिजीत दिपके ने दिल्ली में प्रेस कांफ्रेंस कर गुरुवार को चुनावी प्रक्रिया पर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि विपक्ष के कद्दावर नेताओं के इलाके में एसआईआर करके वोट काटे गए और उसके बाद वे मामूली अंतर से वहां से हार गए।

कॉकरोच जनता पार्टी ने एक और आंदोलन का ऐलान कर दिया है। सीजेपी की डिमांड के मुताबिक अगर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार 48 घंटे के अंदर इस्तीफा नहीं देते हैं तो कॉकरोच जनता पार्टी देशभर में ज्ञानेश कुमार के खिलाफ धरना-प्रदर्शन शुरू कर देगी और ये प्रदर्शन इस्तीफे तक रुकेगा नहीं।

सीजेपी फाउंडर ने आगे कहा कि कुल मिलाकर 13 करोड़ से ज्यादा वोट हटा दिए गए हैं। यह कोई छोटी संख्या नहीं है। 2024 के लोकसभा चुनाव में विपक्ष और सत्ताधारी पार्टी (NDA) के बीच का अंतर सिर्फ 2% था। 13 करोड़ वोट हटाने का मतलब है कुल वोटों का लगभग 13% से 14% हिस्सा हटा देना। क्या ज्ञानेश कुमार जानबूझकर उस 2% के अंतर को बढ़ाने के लिए ऐसा कर रहे हैं ताकि वे कभी सत्ता से बाहर न हों?

दिल्ली की सड़कों पर जल्द ही एग्जाम लीक प्रोटेस्ट की तरह मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ प्रदर्शन देखने को मिल सकता है। कॉकरोच जनता पार्टी के चीफ अभिजीत दिपके इस विरोध-प्रदर्शन का नेतृत्व करते नजर आ सकते हैं। जैसे एग्जाम लीक के मसले पर तब के शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा मांगा गया था, ठीक उसी तर्ज पर चुनाव आयोग के खिलाफ होने वाले प्रोटेस्ट में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के रिजाइन की मांग की जाएगी।

अभिजीत दिपके ने दिया अल्टीमेटम

सीजेपी फाउंडर अभिजीत दिपके ने अल्टीमेटम देते हुए कहा है कि अगर ज्ञानेश कुमार ने 48 घंटे के अंदर इस्तीफा नहीं दिया तो कॉकरोज जनता पार्टी अपना प्रदर्शन शुरू कर देगी और ये प्रदर्शन तब तक खत्म नहीं होगा, जब तक ज्ञानेश कुमार इस्तीफा नहीं दे देंगे।

हम पीछे नहीं हटेंगे

अगर 48 घंटे के अंदर ज्ञानेश कुमार ने इस्तीफा नहीं दिया तो कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) हम दिल्ली में धरना-प्रदर्शन शुरू कर देंगे और जब तक ज्ञानेश कुमार इस्तीफा नहीं देंगे हम पीछे नहीं हटेंगे।

सीजेपी ने सामने रखी 3 मांगें

ज्ञानेश कुमार को 48 घंटे के भीतर इस्तीफा देना होगा। उनके खिलाफ आपराधिक कार्यवाही शुरू की जाए। जवाब देना होगा कि उन्हें वोट चोरी करने का आदेश किसने दिया।

आने वाले सभी चुनावों को रोक दिया जाए। SIR पर तुरंत रोक लगाई जाए। वोटर लिस्ट को जनवरी 2025 की स्थिति पर वापस लाया जाए। SIR से जुड़ी सभी कार्रवाइयों की जांच के लिए एक स्वतंत्र जांच आयोग बने, जिस पर जनता को भरोसा हो। सुप्रीम कोर्ट को तुरंत SIR से जुड़ी फाइलों और रिकॉर्ड को जब्त करने और उन्हें कोर्ट में पेश करने का आदेश देना चाहिए।

ECI नियुक्तियों से जुड़े 2023 के कानून को तुरंत रद्द करें। सिविल सोसाइटी की सक्रिय भागीदारी के साथ एक नया कानून बनाएं, जिसमें चयन की ऐसी स्वतंत्र प्रक्रिया हो जो जनता का भरोसा जीत सके।

अगर 48 घंटों में इस्तीफा नहीं दिया गया तो हम देशव्यापी आंदोलन शुरू करेंगे और इसे तभी खत्म करेंगे जब हमारी सभी मांगें पूरी हो जाएंगी।

10 महीने में 14 बार आपत्ति

ये पूरा विवाद इंडियन एक्सप्रेस की उस रिपोर्ट के बाद शुरू हुआ है, जिसमें दावा किया गया कि चुनाव आयोग के अंदर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और दो चुनाव आयुक्तों सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी के बीच SIR के साथ ही दूसरे फैसलों को लेकर मतभेत चल रहे हैं। रिपोर्ट में दावा किया गया कि सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में EC के कई फैसलों और कार्यप्रणाली पर 14 बार लिखित आपत्ति दर्ज कराई है।

 



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