मल्हार मीडिया ब्यूरो।
केरल में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं। हालांकि, राज्य में मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस में अभी से बगावत के सुर उठने लगे हैं। इस बार यह बागी तेवर पार्टी के किसी धड़े या किसी छोटे नेता की तरफ से नहीं, बल्कि केरल में लोकप्रिय चेहरे और तिरुवनंतपुरम लोकसभा सीट से लगातार चार बार के सांसद शशि थरूर की तरफ से दिखाए गए हैं।
दरअसल, बीते कुछ दिनों में केरल कांग्रेस और थरूर के बीच तनाव खुलकर सामने आ गया है। खासकर जबसे पूर्व केंद्रीय मंत्री ने राज्य की एलडीएफ और केंद्र की एनडीए सरकार को लेकर सकारात्मक बयान दिए हैं।
ऐसे में यह जानना अहम है कि आखिर हालिया समय में थरूर की कांग्रेस से नाराजगी की वजह क्या है? पूर्व केंद्रीय मंत्री के किन वक्तव्यों पर विवाद छिड़ा है? थरूर ने इन मतभेदों को लेकर क्या कहा है? इसके अलावा भाजपा ने कांग्रेस और थरूर के बीच उठे विवाद को लेकर क्या कहा है? आइये जानते हैं...
केस-1: जब एलडीएफ सरकार की आर्थिक नीति की तारीफ की
कांग्रेस की केरल इकाई और उसके सांसद शशि थरूर के बीच विवाद की शुरुआत इसी महीने की शुरुआत में हुई। दरअसल, कांग्रेस सांसद ने एक अंग्रेजी अखबार में लेख में मुख्यमंत्री पिनरई विजयन की लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट (एलडीएफ) सरकार की आर्थिक नीतियों की तारीफ की थी। इस पर केरल कांग्रेस के कई नेताओं ने थरूर को आड़े हाथों लेते हुए कहा था कि विजयन की योजनाएं केरल में कांग्रेस के मुख्यमंत्री रहे ओमान चांडी की तरफ से की गई पहलों का ही आगे का स्वरूप है।
थरूर ने इस मुद्दे पर सफाई देते हुए कहा था कि उन्होंने एलडीएफ सरकार की योजनाओं की नहीं, बल्कि सिर्फ राज्य के औद्योगिक माहौल और स्टार्टअप ईकोसिस्टम में बदलाव की बात की थी, जिसे खुद ओमान चांडी ने शुरू किया था। थरूर ने यह भी कहा था कि उनके लेख में केरल की पूरी अर्थव्यवस्था की बात नहीं कही गई थी, जो कि असल में बुरी स्थिति में है। केरल में लगातार बेरोजगारी बढ़ी है और साक्षर युवाओं की संख्या भी घटी है। हालांकि, थरूर की इस सफाई का केरल कांग्रेस पर कुछ खास असर नहीं दिखा, जिसके कई नेताओं ने थरूर पर हमले जारी रखे।
केस-2: पीएम मोदी के अमेरिकी दौरे को सकारात्मक बताया
कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने इसके बाद पीएम मोदी की अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मुलाकात और उनके अमेरिका से बातचीत के तरीके की तारीफ की थी। हालांकि, बाद में इस मुद्दे पर भी कांग्रेस और थरूर के बीच विवाद की स्थिति पैदा हो गई। विवाद बढ़ता देख थरूर ने कहा कि उन्होंने देश हित में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मुलाकात की तारीफ की थी, क्योंकि इससे कुछ सकारात्मक परिणाम निकले थे।
थरूर ने कहा था कि मेरी राय में कुछ अच्छा हुआ है और मैं एक भारतीय के रूप में इसकी सराहना करता हूं। हमें हमेशा केवल पार्टी हित को देखते हुए ही नहीं बोलना चाहिए। मैं किसी पार्टी का प्रवक्ता नहीं हूं। उन्होंने कहा, अगर मैं हमेशा (सरकार की) तारीफ करता हूं तो कोई मुझे गंभीरता से नहीं लेगा और अगर मैं हमेशा आलोचना करता हूं, तो भी कोई मुझे गंभीरता से नहीं लेगा। उन्होंने सियासी दलों की एक-दूसरे की आलोचना करने की प्रवृत्ति की आलोचना की। उन्होंने कहा, असली समस्या तब पैदा होती है, जब विपक्ष यह मानता है कि सरकार जो भी करती है, वह गलत है और जब सरकार यह मानती है कि विपक्ष जो कुछ भी कहता है, वह गलत है।
हालांकि, उनके इन बयानों पर कांग्रेस के भीतर ही विवाद की स्थिति रही। केरल कांग्रेस ने अपने मुखपत्र वीक्षणम डेली के जरिए थरूर को घेरा और उनके एलडीएफ की आर्थिक नीतियों और पीएम मोदी के अमेरिका दौरे की तारीफ के लिए उन्हें खरी-खरी सुनाई। कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव जयराम रमेश ने इसे थरूर का व्यक्तिगत बयान करार दिया और कहा...
थरूर यहीं नहीं रुके। 18 फरवरी को राहुल गांधी से मुलाकात के बाद उन्होंने कांग्रेस से केरल में अपने आधार का विस्तार करने की अपील की। उन्होंने कहा कि नए मतदाताओं को पार्टी की ओर आकर्षित करने के लिए काम करने को कहा। उन्होंने पार्टी की राज्य इकाई से नेताओं की अनुपस्थिति का भी जिक्र किया। 67 साल के कांग्रेस नेता ने दावा किया कि अन्य कांग्रेस नेताओं ने उनके इस विचार का समर्थन किया कि पार्टी की केरल इकाई में किसी कद्दावर और प्रभावी नेता की कमी है।
थरूर ने स्वतंत्र संगठनों की ओर से किए गए सर्वे का हवाला दिया, जिसमें दिखाया गया कि राज्य में नेतृत्व की स्थिति में वे दूसरों से आगे हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर कांग्रेस ने अपने आधार का विस्तार नहीं किया तो वह केरल में लगातार तीसरी बार विपक्ष में बैठेगी।
बताया जाता है कि कांग्रेस के कई नेताओं ने थरूर के इन बयानों को लेकर नाराजगी जाहिर की। हालांकि, वरिष्ठ कांग्रेस नेता रमेश चेन्निथला ने कहा कि वह थरूर की टिप्पणियों पर प्रतिक्रिया नहीं देना चाहते। उन्होंने कहा, 'मैं समझता हूं कि उन्होंने राहुल गांधी से मिलने से पहले इंटरव्यू दिया था। मैं इस पर प्रतिक्रिया नहीं देना चाहता। हम इसे लेकर कोई विवाद नहीं खड़ा करना चाहते।"
केस-4: थरूर ने इशारों-इशारों में की पार्टी में किनारे किए जाने की बात?
थरूर ने हाल ही में एक पॉडकास्ट में कांग्रेस की तरफ से अपने ऊपर किए गए वार को लेकर नाराजगी जताते हुए पलटवार किया। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि वह कांग्रेस पार्टी के लिए उपलब्ध हैं लेकिन अगर पार्टी को उनकी सेवाओं की जरूरत नहीं है तो उनके पास विकल्प मौजूद हैं। हालांकि, उन्होंने पार्टी बदलने की अफवाहों का खंडन किया।
इससे पहले शनिवार (22 फरवरी) को शशि थरूर ने इंग्लिश कवि थॉमस ग्रे की कविता 'ओड ऑन ए डिस्टेंट प्रॉस्पेक्ट ऑफ ईटन कॉलेज' का एक उद्धरण एक्स पर साझा किया था। इसमें लिखा था, 'जहां अज्ञानता आनंद है, वहां बुद्धिमान होना मूर्खता है।' उन्होंने पोस्ट को कैप्शन दिया था, 'आज का विचार।'
केस-5: केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल के साथ सेल्फी पोस्ट की
शशि थरूर ने मंगलवार को केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल और ब्रिटेन के व्यापार एवं व्यापार राज्य मंत्री जोनाथन रेनॉल्ड्स के साथ एक सेल्फी पोस्ट की और कहा कि लंबे समय से रुकी हुई भारत-ब्रिटेन एफटीए वार्ता का पुनरुद्धार स्वागत योग्य है। शशि थरूर की पोस्ट ने राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है। दरअसल, थरूर और कांग्रेस के बीच तनाव को देखते हुए भाजपा के नेताओं ने भी कुछ पोस्ट किए हैं। भाजपा आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय ने कहा है कि गांधी परिवार की ओर से नामित मल्लिकार्जुन खरगे के खिलाफ पार्टी के अध्यक्ष पद का चुनाव लड़ने के बाद शशि थरूर का कांग्रेस में 'हाशिए पर जाना' अपरिहार्य था।
कांग्रेस के ढांचे में सुधार की मांग करने वाले जी-23 समूह का भी रहे थे हिस्सा
शशि थरूर कांग्रेस के उन वरिष्ठ नेताओं में भी शामिल रहे थे, जिन्होंने अगस्त 2020 कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को चिट्ठी लिखकर पार्टी में ढाचांगत बदलाव की मांग की थी। 23 सदस्यों वाले इस समूह को तब जी-23 नाम दिया गया था। इसने कांग्रेस में आंतरिक चुनाव, साझा नेतृत्व और संगठन में ज्यादा पारदर्शिता की मांग की थी।
G-23 के प्रमुख नेता:
गुलाम नबी आजाद – पूर्व केंद्रीय मंत्री (2022 में कांग्रेस छोड़ दी)।
आनंद शर्मा – पूर्व केंद्रीय मंत्री, राज्यसभा में कांग्रेस के उपनेता।
कपिल सिब्बल – वरिष्ठ वकील और पूर्व केंद्रीय मंत्री (2022 में कांग्रेस छोड़ी, समाजवादी पार्टी से जुड़े)।
शशि थरूर – वरिष्ठ नेता, तिरुवनंतपुरम से सांसद।
भूपिंदर सिंह हुड्डा – हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री।
मनीष तिवारी – पूर्व केंद्रीय मंत्री।
पृथ्वीराज चव्हाण – महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री।
राज बब्बर – अभिनेता एवं पूर्व सांसद।
विवेक तन्खा – वरिष्ठ वकील एवं राज्यसभा सांसद।
मुकुल वासनिक – वरिष्ठ कांग्रेस नेता।
मिलिंद देवड़ा – मुंबई दक्षिण से पूर्व सांसद। कांग्रेस छोड़कर भाजपा का हिस्सा बने।
जीतिन प्रसाद – 2021 में भाजपा में शामिल हो गए।
वीरप्पा मोइली – कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री।
पी. जे. कुरियन – राज्यसभा के पूर्व उपसभापति।
अरविंदर सिंह लवली – दिल्ली कांग्रेस के वरिष्ठ नेता थे। अब भाजपा का हिस्सा।
संदीप दीक्षित – दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित के बेटे और पूर्व सांसद।
एम. ए. खान – तेलंगाना के पूर्व सांसद; 2022 में कांग्रेस से इस्तीफा दिया।
राजिंदर भाटिया – पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री
रेणुका चौधरी – पूर्व केंद्रीय मंत्री
योगानन्द शास्त्री – कांग्रेस के वरिष्ठ नेता। 2021 में एनसीपी का हिस्सा बने, 2024 में कांग्रेस लौटे।
अजय अरुण सिंह – मध्य प्रदेश कांग्रेस के नेता।
कौल सिंह ठाकुर – हिमाचल प्रदेश कांग्रेस के नेता।
अखिलेश प्रसाद सिंह – बिहार कांग्रेस के नेता।
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