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2018 के एट्रोसिटी एक्ट के मामले सरकार लेगी वापस

राज्य, मध्यप्रदेश            May 27, 2022


मल्हार मीडिया भोपाल।
एट्रोसिटी एक्ट को लेकर 2018 में मध्यप्रदेश के ग्वालियर-चंबल संभाग में जो दंगे हुए थे, उनमें दर्ज अपराधिक मामलों को राज्य सरकार वापस ले रही है।

यह ऐलान मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आज किया। उन्होंने कहा कि दंगे गलतफहमी की वजह से हुए थे।

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि चार अप्रैल 2018 को कुछ गलतफहमियों के कारण प्रदेश में अप्रिय स्थितियां पैदा हुई थीं। विशेषकर ग्वालियर-चंबल संभाग में ऐसी स्थितियां बनी थीं। अनुसूचित जाति और सामान्य वर्ग के लोगों के बीच झगड़े हुए थे।

इस कारण दोनों ही वर्गों के लोगों के खिलाफ मुकदमे दर्ज हुए थे। चौहान ने कहा कि पिछले दिनों जब वे ग्वालियर दौरे पर गए थे तो केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया, नरेंद्र सिंह तोमर और राज्य मंत्रिमंडल के सदस्य भी थे।

तब अनुसूचित जाति और सामान्य वर्ग के प्रतिनिधि मंडलों ने उनसे अलग-अलग मुलाकात की थी। दोनों वर्ग के लोगों ने तब हुई अप्रिय घटना को गलतफहमी बताया था।


सीएम शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि सामाजिक समरसता के लिए यह फैसला किया है कि दोनों ही वर्गों के लोगों के खिलाफ दर्ज मुकदमों को वापस ले लिया जाए।

व्यापक विचार विमर्श के बाद यह फैसला किया है। दोनों वर्गों के लोगों की भावनाओं के अनुरूप यह निर्णय लिया है। गौरतलब है कि एट्रोसिटी एक्ट को खत्म करने की दिशा में केंद्र सरकार की एक कोशिश के खिलाफ अप्रैल 2018 में भारत बंद का आव्हान किया गया था।

उस समय मध्य प्रदेश के ग्वालियर-चंबल संभाग में सबसे ज्यादा दंगे भड़के थे और अनुसूचित जाति व सामान्य वर्ग के लोग आमने-सामने आ गए थे। दोनों ही पक्षों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थीं।




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