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कमलनाथ बोले विपरीत परिस्थितियों व जन विरोध को भांपकर शिवराज ने जनआर्शीवाद यात्रा बंद की

प्रदेश लार्इव            Oct 25, 2018


मल्हार मीडिया भोपाल।
मध्यप्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ ने कहा है कि शिवराजसिंह की जन आशीर्वाद यात्रा बनाम जबरन आशीर्वाद यात्रा एक मजाक बनकर रह गयी थी। विपरीत परिस्थितियों को भांपते हुए शिवराजसिंह ने घबराकर यह यात्रा चुनावी व्यस्तताओं का बहाना बनाकर स्वयं बंद कर दी है, जबकि उन्होंने बड़े दंभ के साथ ऐलान किया था कि इसे चुनाव तक चलायेंगे। यात्रा बंद करने का असली कारण जनता द्वारा यात्रा से दूरी बना लेना है।

कमलनाथ ने कहा यह यात्रा अभी तक 187 विधानसभा क्षेत्रों में गयी है, 43 अभी भी बाकी है। मुख्यमंत्री को जनआशीर्वाद यात्रा में जनता नदारत दिख रही थी, क्योंकि आचार संहिता लगने के बाद सरकारी कर्मचारी, पटवारी, आशा-ऊषा कार्यकर्ता सब गायब हो रहे थे।

मुख्यमंत्री को यात्रा के दौरान हजारों शिकायती आवेदन भी मिलने लगे थे। किसान मंडियों में सस्ते दामों पर सोयाबीन, उड़द, मूंग, मक्का, धान, खरीदने की शिकायतें अब आक्रोश के साथ यात्रा में कर रहे हैं। कहीं उन्हें काले झंडे दिखाये जा रहे हैं तो कहीं पत्थर फेंके जा रहे थे। इन्हीं विपरीत परिस्थितियों और जनता की दूरी को भांप कर पार्टी के आकाओं की सलाह पर उन्होंने यात्रा खत्म कर दी।

नाथ ने कहा कि मुख्यमंत्री की जनआशीर्वाद यात्रा के दौरान भाजपा कार्यकर्ता भी एकमत नहीं दिखे। वे भी इस यात्रा से दूरी बनाते रहे। मुख्यमंत्री की यात्रा के दौरान भाजपा की अंतर्कलह और गुटबाजी रोज सामने आ रही थी। उनके बीच रोज सरफुट्टवल हो रही थी। भाजपा के लोग एक दूसरे के साथ रोज मारपीट कर रहे थे। यह सारे दृश्य देखकर मुख्यमंत्री ने अपनी इस ‘‘जबरन आशीर्वाद यात्रा को बीच में ही खत्म कर दिया।

कमलनाथ ने कहा कि मुख्यमंत्री की सरकारी जबरन आशीर्वाद यात्रा पूरी तरह फ्लाप साबित हो गयी। आचार संहिता लगने के बाद जब सरकारी भीड़ नहीं जुटी तो उन्होंने जैसे-तैसे अभी तक यात्रा चलाई। पूरी तरह जब भीड़ का टोटा पड़ गया तो शिवराजसिंह की जगहंसाई होने लगी और उन्होंने यात्रा बंद कर दी। अच्छा हुआ उन्होंने स्थिति भांप कर यात्रा बंद कर दी, नहीं तो एक दिन ऐसा आता कि सभा स्थल पूरी तरह खाली मिलता और उन्हें वापस लौटना पड़ता। वैसे भी इस यात्रा से प्रदेश का कोई भला नहीं हुआ। उल्टा सरकारी खजाने से करोड़ों रूपये इस यात्रा के नाम पर लुटा दिये गये।

उन्होंने कहा कि शिवराजसिंह जन आशीर्वाद यात्राओं में कांगे्रस के नेताओं को कुर्सी से मोह प्रचारित कर रहे हैं। जबकि वास्तविकता यह है कि कांगे्रस के नेताओं को कुर्सी से कोई मोह नहीं है। उन्हें मोह है तो सिर्फ प्रदेश के विकास से। कुर्सी से मोह तो वास्तव में सिर्फ शिवराजसिंह को है। उनसे कुर्सी का मोह छोड़ा नहीं जा रहा है।

कमलनाथ ने कहा कि हर चुनाव के बाद शिवराजसिंह विकास के लिए अगले पांच साल और मांगने लग जाते हैं। जबकि जनता ने उन्हें 15 साल का भरपूर समय दिया है। इन 15 सालों में विकास के मामले में भाजपा सरकार फेल हुई है। उन्हें तो बात करना चाहिए प्रदेश में महिला अत्याचारों की, दुष्कर्मों की, किसान आत्महत्या की, बेरोजगारी की, गरीबी की, कुपोषण की, कर्मचारियों के साथ अन्याय की और शिक्षा-स्वास्थ्य व्यवस्था ध्वस्त करने की।

उन्होंने कहा कि इस सब के बावजूद भी शिवराजसिंह से कुर्सी का मोह नहीं छूट रहा है। वे कुर्सी से स्वयं चिपके हुए हैं। उन्हें तो खुद आगे आकर प्रदेश की उन्नति के लिये अपना कुर्सी का मोह त्यागना चाहिए, क्योंकि जब से प्रदेश में भाजपा की सरकार बनी है, विकास अवरूद्ध हो चला है। जनता ही विकास के लिये बदलाव चाहती है, लेकिन शिवराजसिंह से खुद कुर्सी का मोह नहीं छूट रहा है और वे कुर्सी मोह की बातें कांगे्रस के लिए कर रहे हैं।

मल्हार मीडिया ब्यूरो।

 



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