डॉ.प्रकाश हिन्दुस्तानी।
वाह माननीय सांसद जी, कभी 400 रुपल्ली के जनसेवक थे, अब हर महीने 124000 रुपये लोगे! ये होता है इंक्रीमेंट! सीधे 250 गुना या 25000 प्रतिशत की तरक्की!
सांसदों का वेतन, भत्ते, पेंशन, सुविधाएं फिर बढ़ गईं। वो भी 2 साल के एरियर के साथ! आप इस पर क्या सोचते हैं, बताइए ज़रूर!
आम लोगों की तनख्वाह 5 या 6 प्रतिशत बढ़ती है। कोई अनूठी कंपनी हो तो और थोड़ी ज्यादा बढ़ जाती है। पर माननीय सांसदों ने तो 24 प्रतिशत सैलेरी हाइक ले ली !
आज जारी संसदीय कार्य मंत्रालय की अधिसूचना के मुताबिक सांसदों का मासिक वेतन पहले 1,00,000 रुपये था, जिसे अब बढ़ाकर 1,24,000 रुपये प्रति माह कर दिया गया है। यानी 24,000 रुपये की वृद्धि हुई है।
दैनिक भत्ता भी बढ़ाया, जो पहले 2,000 रुपये प्रतिदिन था, अब 2,500 रुपये प्रतिदिन कर दिया गया है। सीधे 500 रुपये रोज की बढ़ोतरी !
पूर्व सांसदों की पेंशन पहले 25,000 रुपये प्रति माह थी, जो अब 31,000 रुपये प्रति माह हो गई है। यहां भी 6,000 रुपये की वृद्धि।
अतिरिक्त पेंशन भी बढ़ी। जिनको पहले 5 साल से अधिक सेवा के प्रत्येक वर्ष के लिए 2,000 रुपये प्रति माह मिलते थे, वे अब 2,500 रुपये प्रति माह लेंगे। इसमें 500 रुपये की बढ़ोतरी ।
पेंशन का एरियर भी लेंगे। यह नया वेतनमान 1 अप्रैल 2023 से लागू होगा, जिसका मतलब है कि सांसदों को पिछले दो साल का एरियर भी मिलेगा। यह बढ़ोतरी महंगाई और जीवन-यापन की लागत को ध्यान में रखकर की गई है।
1947 (आजादी के समय) सांसदों का वेतन 400 रुपये प्रति माह था। उस समय पेंशन का कोई प्रावधान नहीं था।
1964 में वेतन बढ़ाकर 500 रुपये प्रति माह किया गया। यह पहली बड़ी बढ़ोतरी थी, जिसमें 100 रुपये का इजाफा हुआ।
1985 में वेतन में बदलाव के साथ-साथ भत्तों को व्यवस्थित करने के लिए कानून बनाया गया। केंद्र सरकार को भत्ते संशोधित करने का अधिकार दिया गया।
2006 में वेतन को बढ़ाकर 16,000 रुपये प्रति माह किया गया। यह उस समय तक की बड़ी छलांग थी।
2009 में फिर वेतन में सबसे बड़ी बढ़ोतरी हुई और इसे सीधे 50,000 रुपये प्रति माह कर दिया गया। लगभग 3 गुना से ज्यादा।
2018 में वेतन को 50,000 रुपये से बढ़ाकर 1,00,000 रुपये प्रति माह किया गया। दोगुना इजाफा !
अब भत्तों में भी बढ़ोतरी हुई। निर्वाचन क्षेत्र भत्ता 45,000 रुपये से 70,000 रुपये और कार्यालय भत्ता 60,000 रुपये प्रति माह।
1 अप्रैल 2023 से हर 5 साल में वेतन और भत्तों में स्वचालित बढ़ोतरी का प्रावधान भी जोड़ा गया है।
इस तरह, आजादी के बाद 77 सालों में सांसदों के वेतन में 250 गुना से अधिक की बढ़ोतरी हुई है। कोरोना काल के एक साल सांसदों का वेतन 30 प्रतिशत काम किया गया था।
सांसदों को हर साल 5 करोड़ रुपये क्षेत्र के विकास के लिए मिलते हैं। अतीत में कई सांसदों ने इस निधि से 'विकास कार्य' भी किया है।
कार्यालय भत्ता 60,000 रुपये प्रति माह, जिसमें स्टेशनरी, डाक खर्च और सहायक कर्मचारी शामिल हैं।
2.चिकित्सा भत्ता:
सांसदों और उनके परिवार (पति/पत्नी और आश्रित बच्चों) के लिए मुफ्त चिकित्सा सुविधा CGHS (केंद्रीय सरकार स्वास्थ्य योजना) के तहत। इसके अलावा, निजी अस्पतालों में इलाज का खर्च भी प्रतिपूर्ति योग्य है।
टेलीफोन और इंटरनेट भत्ता: हर साल 1,50,000 मिनट मुफ्त कॉल और 50 जीबी मुफ्त डेटा। इससे अधिक खर्च होने पर सांसद को खुद भुगतान करना पड़ता है।
- यात्रा सुविधाएँ
रेल यात्रा: प्रथम श्रेणी AC या AC-2 टियर में मुफ्त असीमित यात्रा। हर साल 34 मुफ्त रेल कूपन (खुद और परिवार के लिए)।
हवाई यात्रा: हर साल 34 मुफ्त हवाई यात्राएँ (सांसद और उनके जीवनसाथी के लिए)। यह सुविधा कार्यकाल के बाद समाप्त हो जाती है।
सड़क यात्रा: संसदीय काम के लिए मील दर से भुगतान (16 रुपये प्रति किलोमीटर तक)।
- आवास सुविधाएँ
मुफ्त आवास: दिल्ली में सांसदों को मुफ्त सरकारी बंगला या फ्लैट (लुटियंस जोन या अन्य क्षेत्रों में)। अगर सांसद खुद का घर चुनते हैं, तो 2,00,000 रुपये तक का किराया भत्ता।
बिजली और पानी: हर महीने 50,000 यूनिट बिजली और 4,000 किलोलीटर पानी मुफ्त। इससे अधिक खपत पर सामान्य दर से भुगतान।
फर्नीचर और रखरखाव: घर के लिए मुफ्त फर्नीचर (50,000 रुपये तक) और रखरखाव का खर्च सरकार वहन करती है।
- अन्य सुविधाएँ
सुरक्षा: जरूरत पड़ने पर सांसदों को Z या Y श्रेणी की सुरक्षा मुफ्त दी जाती है।
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