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देश भर में बंद हुए 4 लाख 791 स्कूल, इनमें आधे अकेले मप्र के

खास खबर            Sep 02, 2026


मल्हार मीडिया डेस्क।

मध्यप्रदेश के 2,426 स्कूलों में लगा ताला, UDISE+ के आंकड़े बता रहे हैं कि वर्ष 2025-26 में देशभर में कुल 4,791 स्कूल बंद या मर्ज हुए, इनमें अकेले मध्यप्रदेश के 2,426 स्कूल शामिल हैं। यानी देश में बंद या मर्ज हुए स्कूलों में आधे से अधिक हिस्सेदारी मध्यप्रदेश की रही। रिपोर्ट के अनुसार साल 2025-26 के दौरान देश भर में कुल 4791 सरकारी स्कूल बंद किए गए या उनका आपस में विलय किया गया।

हालांकि इस रिपोर्ट में ज्यादा चौंकाने वाली बात यह है कि देश भर में बंद या फिर विलय किए सभी स्कूलों में अकेले मध्य प्रदेश की हिस्सेदारी 50 प्रतिशत यानी आधे से ज्यादा है।

रिपोर्ट के अनुसार, पूरे देश में साल 2025-26 के दौरान कुल 4791 स्कूलों को बंद किया गया या उनका विलय किया गया। देश के इन कुल आंकड़ों में से अकेले मध्य प्रदेश में 2426 स्कूल बंद हुए या मिलाए गए। यानी देश का हर दूसरा स्कूल जो बंद हुआ, वह इसी राज्य का था।

इस पूरी प्रक्रिया के चलते देश भर में स्कूलों की कुल संख्या 14,71,473 से घटकर 14,66,682 पर आ गई है। इन बदलावों की सबसे बड़ी मार सरकारी संस्थानों पर ही पड़ी है।

UDISE+ के आंकड़ों के अनुसार 2025-26 में देश में औसतन करीब 13 स्कूल रोजाना बंद हुए। राज्यों में मध्यप्रदेश सबसे ऊपर रहा। इसके बाद तेलंगाना में 1,392, पश्चिम बंगाल में 568, आंध्र प्रदेश में 474, तमिलनाडु में 369, कर्नाटक में 281 और हिमाचल प्रदेश में 266 स्कूलों की संख्या घटी।

वहीं कुछ राज्यों में स्कूलों की संख्या बढ़ी भी है। बिहार में 946, छत्तीसगढ़ में 234 और दिल्ली में 87 स्कूल बढ़े। हालांकि इन राज्यों में भी छात्र नामांकन में कमी दर्ज की गई।

गौरतलब है कि एक तरफ जहां स्कूलों पर ताले लग रहे हैं या उनका विलय हो रहा है, वहीं दूसरी तरफ बजट में भारी बढ़ोतरी भी देखने को मिली है। रिपोर्ट बताती है कि मध्य प्रदेश का स्कूली शिक्षा बजट बढ़कर 36730 करोड़ रुपए तक पहुंच गया है। साल 2022-23 के मुकाबले इस बजट में करीब 9000 करोड़ रुपए की बड़ी बढ़ोतरी हुई है।

रिपोर्ट के मुताबिक देश में ऐसे स्कूलों की संख्या पहली बार घटी है, जहां एक भी छात्र नामांकित नहीं था। 2024-25 में 7,993 जीरो-एनरोलमेंट स्कूल थे, जो 2025-26 में घटकर 5,663 रह गए। हालांकि इन स्कूलों में अभी भी 20,667 शिक्षक तैनात हैं। UDISE+ रिपोर्ट में स्कूलों की संख्या घटने के साथ डिजिटल सुविधाओं में सुधार भी दर्ज किया गया है। 2025-26 में कंप्यूटर की सुविधा वाले स्कूलों का प्रतिशत 64.7% से बढ़कर 69.9% हो गया।

ऐसे में गौर करने वाली बात यह है कि बजट में रिकॉर्ड बढ़ोत्तरी होने के बावजूद इतनी बड़ी संख्या में सरकारी स्कूलों का बंद होना या उनका विलय होना शिक्षाविदों और आम जनता के बीच एक बड़ा सवालिया निशान खड़ा करता है।

एक तरफ सरकार शिक्षा को बेहतर बनाने और बजट बढ़ाने का दावा कर रही है, तो दूसरी तरफ ज़मीन पर हज़ारों स्कूलों का इस तरह से कम होना ग्रामीण और दूर-दराज के इलाकों में बच्चों की पढ़ाई पर गहरा असर डाल सकता है।

 



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