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शिक्षक भर्ती में होल्ड किए गए पदों के मामले में सरकार से जवाब तलब

मध्यप्रदेश            Mar 20, 2025


 मल्हार मीडिया भोपाल।

मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने आज 20 मार्च गुरुवार को शिक्षक भर्ती में होल्ड किए गए अभ्यर्थियों की याचिकाओं पर विस्तृत सुनवाई की। चीफ जस्टिस सुरेश कुमार कैत और जस्टिस विवेक जैन की डिवीजन बेंच ने 87-13% फार्मूले को लेकर राज्य सरकार से जवाब तलब किया। कोर्ट ने पूछा कि 13% अभ्यर्थियों की भर्ती होल्ड क्यों रखी गई, जबकि इस संबंध में हाईकोर्ट का कोई आदेश नहीं था।

हाईकोर्ट ने सरकार को 2019 से हुई सभी शिक्षक भर्तियों की जानकारी पेश करने का निर्देश दिया। सीनियर एडवोकेट रामेश्वर सिंह ठाकुर ने बताया कि द्वितीय काउंसलिंग में ओबीसी वर्ग के 1000 से अधिक अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र जारी नहीं किए गए और न ही इसका कोई लिखित कारण दिया गया।

महाधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि शिवम गौतम की याचिका में 4 अप्रैल 2022 को पारित अंतरिम आदेश के चलते ओबीसी वर्ग की नियुक्ति रुकी हुई है। इस पर वरिष्ठ अधिवक्ता ने तर्क दिया कि यह याचिका हाईकोर्ट से निपटाई जा चुकी है और सुप्रीम कोर्ट में स्थानांतरित कर दी गई, जहां कोई अंतरिम आदेश पारित नहीं हुआ। बल्कि, सुप्रीम कोर्ट की तीन जजों की बेंच ने 24 फरवरी को छत्तीसगढ़ में 58% आरक्षण लागू करने की अनुमति दी थी।

हाईकोर्ट ने महाधिवक्ता से पूछा कि जब दोनों राज्यों का मामला समान है, तो सुप्रीम कोर्ट का आदेश मध्यप्रदेश में लागू क्यों न किया जाए। महाधिवक्ता ने सरकार से निर्देश लेने के लिए समय मांगा।

अंतरिम आदेश में हाईकोर्ट ने कहा कि राज्य सेवा की सभी भर्तियों में, चाहे प्रक्रिया पूरी हो चुकी हो, ओबीसी के 13% पद रिक्त रखे जाएं। ये पद याचिकाओं के निर्णय के बाद भरे जाएंगे। सरकार को 2019 से अब तक की सभी भर्तियों का पूरा ब्योरा पेश करने का निर्देश दिया गया।

जब अभ्यर्थियों ने कारण जानना चाहा तो लोक शिक्षण संचालनालय भोपाल ने सूचना के अधिकार के तहत बताया है कि याचिका क्रमांक 18105/2021 में पारित अंतरिम आदेश 4 अगस्त 2023 के कारण संबंधितों को नियुक्ति आदेश जारी नहीं किए गए हैं।

जबकि उक्त याचिका हाईकोर्ट द्वारा 28 जनवरी 2025 को खारिज की जा चुकी है।  फिर भी सरकार द्वारा नियुक्ति पत्र जारी नहीं किए गए हैं,  इसलिए पीडि़तों द्वारा ये याचिकाएं दाखिल की गई हैं। महाधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि शिवम् गौतम की याचिका में 4 मई 22 को पारित अंतरिम आदेश के कारण ओबीसी वर्ग को नियुक्ति नहीं दी जा रही है।

हाईकोर्ट ने महाधिवक्ता से कहा कि छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश दोनों राज्यों का विवाद एक समान है तो सुप्रीम कोर्ट का उक्त आदेश मध्य प्रदेश में क्यों न लागू कर दिया जाए? तब महाधिवक्ता ने कोर्ट को तत्संबंध में सरकार से इंस्ट्रक्शन लेने का समय माँगा।

तब हाईकोर्ट ने टिप्पणी की ये अजीब बात है सरकार अपना कानून क्यों लागू नहीं करना चाहती! हाईकोर्ट द्वारा गुरूवार को अंतरिम आदेश पारित कर कहा गया कि राज्य सेवा की समस्त भर्तियों में भले ही प्रक्रिया समाप्त हो चुकी हो, उन सभी में ओबीसी के 13 प्रतिशत पद रिक्त रखे जाएँ जो याचिकाओं के निर्णय उपरांत निराकृत किए जाएँगे तथा हाईकोर्ट ने कहा कि उक्त प्रकरणों में 2019 से अब तक की समस्त भर्तियों से संबंधित तथ्यों को लिखित में दाखिल करें।

 


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