मल्हार मीडिया ब्यूरो
राज्यसभा टीवी ने मीडिया में फैलाए जा रहे उन आरोपों का खंडन किया है, जिसमें उल्लेख किया गया है कि पिछले चार साल में चैनल ने 1700 करोड़ रुपए खर्च किए हैं। चैनल ने स्पष्ट रूप से कहा कि, ‘पिछले चार सालों (2010-2014 के बीच) में कुल खर्च केवल 146.7 करोड़ रुपए हुआ, जिसमें सैलरी, किराया, कैपिटल कॉस्ट और ऑपरेशनल एक्सपेंसेज शामिल हैं। 1700 करोड़ रुपए का आंकड़ा मात्र एक कल्पना है।’
जारी किए गए अपने बयान में राज्यसभा टीवी की ओर से कहा गया है कि CAG की रिपोर्ट पर उल्लेख किया जाए तो ऐसा नहीं लगता कि राज्यसभा टीवी के खिलाफ कोई भी रिपोर्ट CAG ने पेश की हो या फिर पब्लिश की हो। डायरेक्टर जनरल ऑफ ऑडिट (Central Expenditure) ने वार्षिक ऑडिट के दौरान कुछ ड्राफ्ट ऑब्जर्वेशंस तैयार किए थे, जिसमें राज्यसभा टीवी भी शामिल था। तथ्यात्मक अशुद्धियों और झूठी रिपोर्ट के साथ पेश किए इस ड्राफ्ट ऑब्जर्वेशंस को नष्ट कर दिया गया है। इसके बावजूद राज्यसभा टीवी ने इन ऑब्जर्वेशंस को लेकर संतोषजनक ढंग से उत्तर दिया और DGACE ने खुद ही पिछले साल इसका समाधान किया।
राज्यसभा टीवी ने आगे कहा कि वित्त मंत्रालय ने कभी भी RSTV से नाराजगी के संदर्भ में कोई सूचना नहीं दी। इसके अलावा RSTV के बजट को भी कठिन परिस्थितियों के तहत कम नहीं किया गया और चैनल ने हमेशा ही अपने स्वीकृत किए गए बजट के अंदर काम किया है।
क्या है मामला
दरअसल नियंत्रक-महालेखा परीक्षक (CAG) की जांच रिपोर्ट में राज्यसभा टेलिविजन (RSTV) की कार्यप्रणाली पर काफी सवाल उठाए गए हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि इस चैनल के पास अपना कोई रोडमैप ही नहीं है। वहीं संसद के ऊपरी सदन के लिए अलग से चैनल की सार्थकता पर भी प्रश्न चिह्न लगाया गया है। CAG की रिपोर्ट में कहा गया है कि वर्ष 2011 में शुरु होने के बाद से चैनल पर अब तक 1700 करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं। हालांकि चैनल की शुरुआत 2011 में हुई थी लेकिन उसने पूरी तरह काम करना मई 2012 से शुरू किया था। रिपोर्ट के अनुसार चैनल के पूरी तरह कार्य शुरू करने से पूर्व फरवरी 2012 तक एग्जिक्यूटिव डायरेक्टर और एग्जिक्यूटिव एडिटर्स की यात्राओं पर 60 लाख रुपये खर्च किए गए थे। इसके बाद शुरू हुए RSTV से अब तक कोई रेवेन्यू नहीं मिला है वहीं इसकी भर्ती में भी नियमों का पालन नहीं हुआ है। यह भी कहा गया है कि इन बातों के अलावा RSTV की दर्शक संख्या भी नहीं है।CAG की रिपोर्ट में यह भी सवाल उठाया गया है कि बिना सरकार या राज्य सभा की अनुमति के कैसे इस चैनल में महत्वपूर्ण पदों पर नियुक्ति कर उनका वेतन निर्धारित कर दिया गया है। इस रिपोर्ट में RSTV मैनेजमेंट द्वारा लिए गए कई निर्णयों पर भी सवाल उठाया गया है।
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