मल्हार मीडिया डेस्क।
मंगलवार 26 मार्च को अमेरिकी आयोग ने अंतरराष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता पर टिप्पणी करते हुए भारत में अल्पसंख्यकों की स्थिति पर चिंता जताई है. आयोग ने कहा कि भारत में अल्पसंख्यक समुदायों, खासकर मुस्लिम और ईसाई समुदायों के साथ भेदभाव और बुरा व्यवहार हो रहा है.
इतना ही नहीं अमेरिकी आयोग ने भारत की जासूस एजेंसी RAW (रिसर्च एंड एनालिसिस विंग) के खिलाफ प्रतिबंध लगाने की भी सिफारिश की है. आयोग ने कहा कि RAW पर आरोप है कि वह सिख अलगाववादियों की हत्या में शामिल है, हालांकि यह आरोप बेबुनियाद बताए गए हैं.
अमेरिकी आयोग की ये टिप्पणी भारत की आंतरिक राजनीति और सुरक्षा संबंधी मामलों में दखल देने की कोशिश मानी जा सकती है, जो भारतीय सरकार के लिए विवादास्पद हो सकता है. अमेरिका के इस कदम पर सवाल उठाए जा रहे हैं, क्योंकि खुद अमेरिका का इतिहास भी प्रवासियों और अल्पसंख्यकों के अधिकारों के उल्लंघन से भरा पड़ा है. अमेरिका को खुद दुनियाभर में अपने सख्त प्रवास नीति के तहत प्रवासियों को क्रूर तरीके से निपटने के लिए जाने जाते हुए कई बार आलोचनाओं का सामना करना पड़ता रहा है.
RAW (रिसर्च एंड एनालिसिस विंग) भारत की प्रमुख विदेशी खुफिया एजेंसी है, जो भारतीय सुरक्षा और खुफिया जानकारी जुटाने का कार्य करती है. इसकी स्थापना 1968 में हुई थी और इसका मुख्य उद्देश्य भारतीय हितों की रक्षा के लिए विदेशों में खुफिया जानकारी प्राप्त करना है. RAW आतंकवाद, बाहरी खतरों, और भारत की सुरक्षा से संबंधित अन्य मुद्दों पर निगरानी रखती है. यह विशेष रूप से पाकिस्तान, चीन और अन्य पड़ोसी देशों के बारे में खुफिया जानकारी जुटाने में सक्रिय रहती है. RAW भारतीय विदेश नीति और सुरक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण मामलों में अहम भूमिका निभाती है.
रॉयटर्स ने अपनी रिपोर्ट में इसी सवाल के जवाब में कहा है कि इस बात की संभावना काफी कम है कि अमेरिकी सरकार भारत की जासूसी संस्था RAW के खिलाफ प्रतिबंध लगाएगी, क्योंकि पैनल की सिफारिशें बाध्यकारी नहीं है.
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