नवीन रंगियाल।
मैं चाहता हूं की ज्यादातर लोग मेरी किताब पढ़ें. कविताएं और गद्य उन तक पहुंचे. लेकिन बहुत अजीब सा ख्याल या सनक रही है की मेरे घरवाले मुझे न पढ़े.
हालांकि उन्हें अब...
राकेश कायस्थ।
अचानक मुझे कल्लूमल जी बहुत जोर से याद आ रहे हैं, अगर आप मेरी पीढ़ी के हैं तो आपको भी याद होंगे।
कल्लूमल कोयले वाले यानी चमेली के बापू और...
संजय स्वतंत्र।
जब हम हिंदी में लिखते हैं तो कई शब्दों को लेकर असमंजस में रहते हैं। कई बार शब्दों का चयन ठीक से नहीं करते या फिर उन्हें गलत लिख देते हैं।...
मल्हार मीडिया भोपाल ।
मध्यप्रदेश के सागर के लिए गौरव की बात है कि डॉ हरीसिंह गौर विश्वविद्यालय सागर में राजभाषा अधिकारी सुप्रसिद्ध लेखिका डॉ. छबील मेहेर को कथेतर गद्य विधा में बागेश्वरी पुरस्कार –...
संजय वोहरा।
कश्मीर के गांवों के घरों में एक ख़ास तरह का पौधा सूखता हुआ दिखाई देता है .
आमतौर पर धूप में और सूख जाने पर स्टोरनुमा किसी ऐसे स्थान पर ये...
सचिन कुमार जैन।
पूरी दुनिया में यह एक पुरानी बहस है कि क्या हथियार या शस्त्र धारण करना व्यक्ति का मूलभूत अधिकार है?
अमेरिका समेत कई देशों में जितनी जनसंख्या...
अनिल सिंह।
पूरनपुर विधानसभा का सेंट्रल हॉल सज चुका था।
हसन भाई गुलदस्ता एवं फरीद भाई मोमेंटो शानदार ड्रेस में तैयार होकर मौका मुआयना कर रहे थे।
एक-एक चीज की बारीकी से जांच...
कौशल सिखौला।
सूर्य की रश्मियों पर सवार होकर आते हैं पितृ
भाव के भूखे हैं पितृगण
ब्रह्माण्ड में दक्षिण दिशा स्थित पितृलोक में निवास करने वाले पितृ श्रद्धा और भाव के भूखे हैं...
श्रीकांत सक्सेना।
जीवन की व्याख्या या तो वैज्ञानिक ढंग से या फिर रहस्यवादी दृष्टि से करने की परंपरा रही है। अब जब बहुत सी सूचनाएं और तथ्य सामने आ चुके हैं तो...