संजय स्वतंत्र।
क्या आपने कभी अपनी बालकनी में किसी मधुमक्खी को मंडराते देखा है? वह क्या ढूंढ़ रही है आपके पास?
क्या करने आई है वह आप समझ नहीं पाते?
दरअसल, वह...
कुमार क्षितिज।
इश्क की कोई भाषा नहीं होती है, इसे मजहब या वक्त की बेड़ियों से नहीं बांधा जा सकता है।
प्यार की कहानियों के किरदार हमेशा जीवित रहते हैं। प्रेम अगर किसी इंसान की...
विष्णु नागर।
अक्सर मैं विज्ञापनों पर नजर नहीं डालता, पत्नी ने ' दैनिक भास्कर ' के राष्ट्रीय संस्करण में ' ज्योतिष' के नाम पर छपे विज्ञापनों की ओर ध्यान दिलाया, जिनका...
पंकज पाराशर।
हिंदुस्तान की आज़ादी की 75वीं सालगिरह उन सबको भी मुबारक, जिनके कारनामे तारीख़ के पन्नों में दर्ज़ नहीं. जिनकी जान, जिनके धन की क़ीमत आज तक नहीं समझी गई....
संजीव शर्मा।
यह महाकवि रसखान की समाधि है। भगवान कृष्ण के अनन्य भक्त रसखान की स्मृति और वर्तमान परिदृश्य में हिंदू-मुस्लिम समभाव का एक सशक्त स्थल ।
उप्र के मथुरा के क़रीब गोकुल और...
संजय स्वतंत्र।
आप मुझे जानते हैं। यहीं मिले थे हम। मैं अभि की माया हूं। अभि यानी मेरे हृदय में विराजमान कान्हा। हर जनम में मिलती हूं उससे। ये तो कान्हा का...
ध्रुव गुप्त।
जन्माष्टमी भारतीय संस्कृति के सबसे चमकते सितारे श्री कृष्ण का जन्मदिन है।
कृष्ण की स्मृति मात्र से हमारे आगे उनकी अनगिनत छवियां एक साथ उपस्थित हो जाती हैं- एक नटखट बच्चा, एक चंचल...
अनिल कुमार।
मांगेराम शर्मा बीते पंद्रह दिन से बीमार था। मैं बीमार दोस्त को देखने की गरज से मांगेराम के घर पहुंचा। मांगे कमजोर दिख रहा था।
भाभीजी ने बताया, ”अभी रामभरोसे के...
राकेश कायस्थ।
हरिशंकर परसाई इस धरती पर 71 साल तक रहे। जब तक जिये लगातार लिखते रहे। परसाई को दुनिया छोड़े 27 साल हो गये हैं।
मान लीजिये अगर परसाई अगर होते तो क्या करते?...