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पूर्व RBI गर्वनर का सुझाव, भारत सरकार को तेल रिफाइनरियों पर विंडफॉल टैक्स लगाने पर विचार करना चाहिए

अंतर्राष्ट्रीय            Aug 31, 2025


मल्हार मीडिया डेस्क।

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन ने अहम सुझाव दिया है। यह सुझाव डोनाल्ड ट्रंप की ओर से भारतीय सामानों पर लगाए गए 50% टैरिफ से होने वाले आर्थिक नुकसान को कम करने के लिए है। ट्रंप ने यह टैरिफ रूसी तेल खरीदने के कारण लगाया है।

रघुराम राजन ने लिंक्‍डइन पर एक पोस्ट शेयर किया है। इसमें उन्‍होंने कहा कि भारत सरकार को तेल रिफाइनरियों पर विंडफॉल टैक्स लगाने पर विचार करना चाहिए। ये रिफाइनरी कंपनियां रियायती कच्चे तेल से मुनाफा कमा रही हैं।

राजन ने यह भी कहा कि इस टैक्स से जमा धन को भारत के छोटे और मध्यम उद्यमों (SME) को समर्थन देने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। खासकर टेक्सटाइल और परिधान उद्योग को, जो भारी अमेरिकी टैरिफ का सामना कर रहे हैं।

रघुराम राजन ने कहा, 'यह देखते हुए कि रूसी तेल खरीदने की कीमत अब हमारे छोटे और मध्यम निर्यातकों (जैसे परिधान और टेक्सटाइल में) पर पड़ रही है, क्यों न हमारी रिफाइनरियों पर रूसी तेल खरीदने के अनुपात में विंडफॉल प्रॉफिट टैक्स लगाया जाए और इसे हमारे छोटे और मध्यम निर्यातकों को ट्रांसफर किया जाए?' उन्होंने आगे कहा, 'इससे यह सुनिश्चित होगा कि भारत में जो लोग रूसी तेल से लाभान्वित हो रहे हैं, वे भी इसके लिए भुगतान करें, बजाय इसके कि दूसरे लोग भुगतान करें।'

50% टैर‍िफ को बताया था वेक-अप कॉल

विंडफॉल टैक्स यह सुनिश्चित करेगा कि जो लोग रूसी तेल से लाभान्वित होते हैं, वे दूसरों पर पड़ने वाली लागतों को कम करने में भी योगदान करें। रघुराम राजन ने पहले भारत पर लगाए गए 50% टैरिफ पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए इसे भारत सरकार के लिए 'वेक-अप कॉल' बताया था। उन्होंने यह भी कहा था कि 50% टैरिफ संकेत देते हैं कि भारत और अमेरिका के बीच संबंध 'स्पष्ट रूप से टूट गए' हैं।

 राजन ने इंडिया टुडे टीवी के साथ इंटरव्यू में कहा था, 'यह एक वेक-अप कॉल है। हम किसी एक देश पर बहुत अधिक निर्भर न हों। हम पूर्व की ओर, यूरोप, अफ्रीका की ओर देखें और अमेरिका के साथ काम करना जारी रखें। लेकिन, ऐसे सुधारों को लागू करें जो हमें अपने युवाओं को रोजगार देने के लिए जरूरी 8-8.5% विकास हासिल करने में मदद करें।'

ट्रंप प्रशासन ने भारतीय सामानों पर 50% टैरिफ लगाया है। यह बीते बुधवार यानी 27 अगस्त से प्रभावी हो गया है। अमेरिका ने रूस से भारत के कच्चे तेल के आयात का हवाला देकर अतिरिक्त 25% टैरिफ लगाया है। उसका कहना है कि इससे यूक्रेन में युद्ध को बढ़ावा मिल रहा है।

 इस अचानक झटके के कारण हजारों भारतीय छोटे व्यवसाय अब यूरोप, अफ्रीका और एशिया के बाजारों में नए खरीदारों को खोजने के लिए हांथ-पांव मार रहे हैं। वे अमेरिका को निर्यात पर टैरिफ के प्रभाव को कम करना चाहते हैं। सबसे ज्यादा प्रभावित क्षेत्रों में टेक्सटाइल, परिधान, ऑटो, खाद्य और पेय पदार्थ शामिल हैं।

 टैरिफ के बावजूद भारत ने सभी आरोपों को खारिज कर दिया है। मॉस्को के साथ व्यापार जारी रखने का फैसला किया है। न्‍यू एजेंसी रॉयटर्स को तेल की बिक्री में शामिल तीन सूत्रों ने बताया कि भारतीय रिफाइनरियां सितंबर में रूसी तेल की खरीद को अगस्त के स्तर से 10-20% या 150,000 - 300,000 बैरल प्रति दिन तक बढ़ा देंगी। भारत के लिए रूसी तेल के दो सबसे बड़े आयातक रिलायंस और नायरा एनर्जी हैं। इनमें से नायरा एनर्जी में रूसी स्वामित्व है।

 


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