मल्हार मीडिया भोपाल।
संबल योजना में हुए भृष्टाचार को मध्यप्रदेश सरकार के मंत्री ने विधानसभा में स्वीकार किया है।
पंचायत और ग्रामीण विकास तथा श्रम मंत्री प्रहलाद पटेल ने सदन में विभागीय अनुदान मांगों पर चर्चा के बाद कहा कि मृत हितग्राहियों के नाम पर पैसा निकल गया है, यह सही है और इसे स्वीकार करने में कोई संकोच नहीं है। विधानसभा की कार्यवाही गुरुवार सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई है।
गौरतलब है कि कल सोमवार 17 मार्च को कैग की रिपोर्ट पटल पर रखी गई थी जिसमें संबल योजना सहित अन्य योजनाओं में भृष्टाचार सामने आया है।
कैग रिपोर्ट में गड़बड़ी उजागर होने के बाद मंत्री पटेल ने कहा कि उस व्यवस्था को सुधारने का काम भी किया गया है। यह स्थिति इसलिए बनी थी क्योंकि संबंधित हितग्राही का केवाईसी अपडेट नहीं था।
उन्होंने कहा कि एक तरफ जाति को मिटाने की बात करते हैं तो दूसरी तरफ हम कहते हैं कि किस जाति को क्या मिला। हमें प्राथमिकता मौजूदा स्थितियों के हिसाब से तय करना चाहिए।
उन्होंने आगे कहा कि हम इतने सचेत नहीं हैं, जितना हमारा मजदूर मोबाइल को लेकर सचेत है। 2014 के बाद शुरू हुई किसी योजना में जाति के आधार पर काम नहीं हुआ है। प्रधानमंत्री आवास योजना इसका उदाहरण है। एमपी में कांग्रेस की सरकार के समय संबल योजना में जो काम बंद हुआ था, उसका बैकलॉग अब तक क्लियर नहीं हुआ है। अभी बैकलॉग क्लियर होने में 6 महीने का समय और लगेगा।
ज्ञातव्य है कि कैग रिपोर्ट में खुलासा हुआ था कि बहुत सारे पात्रों को योजना का लाभ देने के बजाय कर्मचारियों ने धनराशि का बंदरबांट किया गया है। अपने और रिश्तेदारों के नाम से करोड़ों रुपए जमा किए गए थे। 67.40 लाख श्रमिकों को अपात्र बताकर योजना से बाहर किया। सत्यापन किया गया तो उसमें 14.34 लाख के अपात्र होने का कारण भी नहीं बताया गया।
गौरतलब है कि संबल योजना के तहत श्रमिकों के लिए 5 हजार रुपये अंत्येष्टि सहायता, 2 लाख रुपये सामान्य मृत्यु सहायता, 4 लाख रुपये दुर्घटना मृत्यु सहायता, 1 लाख रुपये आंशिक दिव्यांगता सहायता और 2 लाख रुपये स्थायी दिव्यांगता सहायता दी जाती है।
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