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खिलौना पॉलीटिक्स:कांग्रेस ने पूछा सीएम से सवाल, लंबे कार्यकाल के बावजूद आंगनवाड़ी क्यों हैं बदहाल

राजनीति            May 26, 2022


मल्हार मीडिया भोपाल।
मध्यप्रदेश में आंगनवाड़ी के बच्चों के लिए खिलौने एकत्र करने को लेकर विपक्ष मुख्यमंत्री शिवराज सिंह लगातार विपक्ष के निशाने पर हैं।

पहले तो पूर्व मंत्री और विधायक पीसी शर्मा ने मुख्यमंत्री से एक दिन पहले ही खिलौने खरीदकर बांट दिए थे। उसके बाद से लगातार बयानबाजी का दौर जारी है।

आज पीसीसी में विधायक पी.सी.शर्मा, म.प्र. महिला कांग्रेस की अध्यक्ष विभा पटेल, मीडिया उपाध्यक्ष भूपेन्द्र गुप्ता और प्रवक्ता संगीता शर्मा ने संयुक्त पत्रकार वार्ता में कहा कि बच्चे कुपोषण से बेहाल, आंगनवाडियां बदहाल, शिवराज जी ठेले से गला रहे अपनी प्रसिद्धी की दाल।

उन्होंने कहा कि बीते दिनों मध्यप्रदेश के चौथी बार के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने 17 वर्षों बाद आंगनवाडी में पढ़ने वाले बच्चों की सुध ली। उन बच्चों के लिए खिलौने एकत्रित करने ठेले पर निकले। विडम्बना देखिये आंगनवाडियों में पढ़ने वाले बच्चों को शिवराज जी के फोटो वाले बड़े-बड़े विज्ञापन और समाचार पत्रों की सुर्खियों के अलावा कुछ भी हासिल नहीं हुआ।

गंभीर कुपोषण का शिकार मध्यप्रदेश के बच्चों के लिए न तो पोषण आहार उपलब्ध है ना आंगनवाडियों में कोई संसाधन। मध्यप्रदेश के नौनिहालों के भविष्य को भाजपाई सत्ता ने अंधकार में ढकेल कर बस अपनी प्रसिद्धी का उजाला फैलाया। आंगनवाडियों की बदहाली।

मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को जवाब देना चाहिए कि उनके इतने लंबे कार्यकाल के बावजूद मध्यप्रदेश की आंगनवाडियां अपनी बदहाली पर आंसू क्यों बहा रही हैं? मध्यप्रदेश में कुल स्वीकृत आंगनवाडी 97135 हैं। जिनमें कई मूलभूत सुविधाएं भी बच्चों को मुहेया नहीं हैं।

इन आंगनवाडियों में दर्ज 3 से 6 वर्ष के दर्ज 3896977 पोषण आहार लाभार्थी है जिसमें से सिर्फ 3146106 लाभार्थियों को ही पोषण आहार का लाभ मिल रहा है अर्थात 750871 बच्चों को पोषण आहार दिया ही नहीं जा रहा है। मुख्यमंत्री जी ने घोषणा की है कि वे अगले 18 माह में मध्यप्रदेश से कुपोषण दूर कर देंगे।

उन्होंने कहा कि सच्चाई यह है कि मध्यप्रदेश में नेशनल फेमिली हेल्थ सर्वे (4) जो कि 2015-16 में किया गया था और नेशनल फेमिली हेल्थ सर्वे (5) जो कि 2021 में किया गया, यह बताता है कि इस दौरान 6 से 59 महिने के बच्चे जो 68 प्रतिशत खून की कमी के शिकार थे वे बढ़कर 72.7 प्रतिशत हो गए ।

अति-गंभीर कुपोषण का शिकार बच्चे नेशनल फेमिली हेल्थ सर्वे (4 और 5) के बीच धार में 5.7 प्रतिशत बढ़ गए, रीवा में 10.8 प्रतिशत बढ़ गए, खंडवा में 13.6 प्रतिशत बढ़ गए, देवासं में 38.2 प्रतिशत बढ़ गए, उज्जैन में 82.6 प्रतिशत बढ़ गए, बुरहानपुर में 95.5 प्रतिशत बढ़ गए, खरगोन में 108.8 प्रतिशत बढ़ गए, हरदा में 118.6 प्रतिशत बढ़ गए।
मध्यम गंभीर कुपोषित बच्चे इंदौर में 19.1 प्रतिशत बढ़ गए, बुरहानपुर में 38.8 प्रतिशत बढ़ गए, उज्जैन में 55.2 प्रतिशत बढ़ गए, खरगोन में 29.2 प्रतिशत बढ़ गए, हरदा में 11 प्रतिशत बढ़ गए। इसी प्रकार बच्चों में ठिगनापन 10 जिलों में बढ गया जिसमें सागर, छतरपुर पन्ना, झाबुआ, कटनी, उमरिया, सिंगरौली, शहडोल, सतना एवं बालाघाट है ।
कम वजन वाले बच्चे भी इस दौरान 5 जिलों में कटनी, बुरहानपुर, बालाघाट, उज्जैन एवं सागर में बढ़ गए है ।

पत्रकारवार्ता में मीडिया विभाग उपाध्यक्ष भूपेंद्र गुप्ता ने कहा कि मुख्यमंत्री जी ने ठेला निकालकर आठ ट्रक खिलौने आंगन वाड़ी के बच्चों के लिये कथित रूप से इकट्ठे किये हैं।

बच्चों के प्रति उनकी चिंता जायज हो सकती है क्योंकि प्रदेश में 10लाख बच्चे कुपोषित हैं।

ठिगने बच्चों की संख्या भी बढ़ रही है। आंगन वाड़ियों को चलाने के लिये सरकार के पास भरपूर बजट तो है ही। कुपोषण दूर करने के लिये केन्द्रीय अनुदान भी मिलता है। फिर भी सरकार इन समस्यायों को 17 साल में हल नहीं कर पाई है।

कांग्रेस मीडिया उपाध्यक्ष भूपेन्द्र गुप्ता ने प्रेस वार्ता में मांग की कि सरकार बताये जो 94 करोड़ के खिलौने मार्च 2020 तक लघु उद्योग निगम के माध्यम से कमलनाथ सरकार ने प्रदाय किये थे वे कहां गये, कि सरकार को 2 साल में ही ठेला निकालकर मांगीलाल बनने की आवश्यकता पड़ गयी।

गुप्ता ने कहा कि भाजपा सरकार में बड़े-बड़े घोटालों को दबाने के लिये ही भव्य ईवेंट किये जाते हैं ,योजना से अधिक प्रचार पर खर्च होता है ,कहीं यह ईवेंट भी किसी बड़े घोटाले को छुपाने की चेष्टा तो नहीं है?

 



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