गहलोत की इन पांच गलतियों से गयी अध्यक्ष पद की दावेदारी

राजनीति            Sep 29, 2022


मल्हार मीडिया डेस्क।

राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत कांग्रेस के अध्यक्ष नहीं बन पाएंगे। उनका मुख्यमंत्री पद भी खतरे में है।

गहलोत गुट के विधायकों का शक्ति प्रदर्शन और इस्तीफा पॉलिटिक्स से सीएम अशोक गहलोत के सियासी समीकरण बिगड़ गए हैं।

अब यह तो साफ हो गया है कि गहलोत कांग्रेस अध्यक्ष पद का चुनाव नहीं लड़ेंगे।

वहीं, वह मुख्यमंत्री रहेंगे या नहीं इस पर भी हाईकमान फैसला कर सकता है।

आज यानी गुरुवार दोपहर को अशोक गहलोत ने सोनिया गांधी से मुलाकात की।

गहलोत जब सोनिया गांधी से मिलने जा रहे थे तो उनके हाथ में कुछ कागज भी थे।

जिसमें से एक को माफीनामा बताया जा रहा है,  इस पर लिखा हुआ था कि जो कुछ हुआ उसका दुख है, इससे मैं बहुत आहत हूं।

सोनिया गांधी से करीब डेढ़ घंटे की मुलाकात के बाद सीएम ने मीडिया से बात की।

उन्होंने कहा- कि वे कांग्रेस अध्यक्ष पद का चुनाव नहीं लड़ेंगे। मैंने कांग्रेस में हमेशा वफादार सिपाही के रूप में काम किया है। विधायक दल की बैठक से पहले जो हुआ उससे मैं आहत हूं।

21 सितंबर को गहलोत राहुल और सोनिया गांधी से मिलने के लिए जाने वाले थे। इससे पहले 20 सितंबर की रात जयपुर में विधायक दल की बैठक हुई।

जिसमें गहलोत ने कहा, राहुल गांधी से मिलकर उन्हें कांग्रेस अध्यक्ष बनने के लिए आखरी बार मनाने की कोशिश करूंगा, नहीं माने तो जैसा आलाकमान कहेगा वही करूंगा, जरूरत पड़ने पर आपको (विधायकों को) तकलीफ दूंगा।

इस पर विधायकों ने कहा, आपको यहीं रहना है तो गहलोत ने भी कहा, मैं अंतिम सांस तक राजस्थान की सेवा करूंगा, कुछ भी बन जाऊं, लेकिन आपसे दूर नहीं जाऊंगा।

 यानी साफ संकेत थे कि गहलोत राजस्थान छोड़ने को तैयार हैं।

इस बैठक में आलाकमान के सामने रखने के लिए चार मांगों पर सहमति बनाई गई।

पहली- राहुल गांधी ही कांग्रेस अध्यक्ष बने, दूसरी- गहलोत अध्यक्ष बनते हैं तो सीएम भी रहेंगे, तीसरी- कांग्रेस अध्यक्ष पद के चुनाव बाद गहलोत इस्तीफा देंगे। चौथी-नया सीएम गहलोत के विधायकों में से बनेगा।

इस बैठक में तय की गईं मांगों से संकेत गया कि गहलोत गुट के विधायक आलाकमान से सीधे टकराना चाहते हैं।

इसके बाद भी गहलोत ने इस टकराव को रोकने की कोशिश नहीं की। 

नए सीएम पद के दावेदारों की चर्चा के बीच गहलोत गुट के विधायक लगातार बयान देते रहे, लेकिन गहलोत ने उन्हें काबू करने की कोशिश नहीं की।

रविवार 25 सितंबर की दोपहर दिल्ली से अजय माकन और मलिकार्जुन खड़गे नए सीएम उम्मीदवार को लेकर विधायकों से चर्चा करने जयपुर पहुंचे।

इसके बाद गहलोत गुट के विधायक सक्रिय हो गए। विधायकों को शाम पांच बजे मंत्री शांति धारीवाल के आवास पर एकत्रित होने के निर्देश दिए गए।

 उधर, गहलोत भरतपुर दौरे पर रहे। मीडिया के बैठक की खबरें आने के बाद भी उन्होंने विधायकों को रोकने की कोशिश नहीं की।

इससे साफ संकेत गया कि गहलोत के इशारे या उनकी सहमति के बाद ही यह सब हो रहा है।     

25 सितंबर की शाम सात बजे विधायक दल की बैठक होनी थी।

इससे पहले गहलोत गुट के विधायक मंत्री शांति धारीवाल के घर जुटे और 2020 में मानेसर जाने वाले विधायकों के खिलाफ खड़े हो गए।

विधायक खुले तौर पर मीडिया में पायलट के खिलाफ बयान देते रहे।

92 विधायकों ने बैठक का बहिष्कार कर दिया और विधानसभा अध्यक्ष सीपी जोशी को इस्तीफा सौंप दिया। उधर, पायलट और उनके समर्थक विधायक समय पर बैठक में पहुंचे, किसी तरह का कोई बयान भी नहीं दिया।

बैठक निरस्त होने के बाद गहलोत गुट के मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास, शांति धारीवाल, महेश जोशी और विधायक संयम लोढ़ा अजय माकन और मलिकार्जुन खड़गे से मिलने गए तो उन्होंने उनकी नहीं सुनी। विधायकों ने गहलोत की मौजूदगी में उनके सामने तीन मांगें भी रख दी। इस पूरी कवायद को गहलोत की नाकामी माना गया।

अध्यक्ष पर की दावेदारी के बीच अशोक गहलोत ने कई बार कहा कि वह अंतिम सांस तक राजस्थान की सेवा करेंगे। कुछ भी बन जाएं, लेकिन राजस्थान दूर नहीं जाएंगे।

इससे संकेत गया कि गहलोत सीएम पद नहीं छोड़ना चाहते हैं। वह दोनों पदों पर रहना चाहता है, गहलोत का यह बयान भी उन्हें अध्यक्ष पद की दावेदारी से दूर ले गया।

विधायक दल की बैठक वाली शाम विधायकों के विरोध के देखते हुए केसी वेणुगोपाल ने अशोक गहलोत से फोन पर बात की।

वेणुगोपाल ने गहलोत से विधायकों को शांत करने के लिए कहा, लेकिन गहलोत ने उनसे कह दिया कि यह मेरे बस की बात नहीं है।

 इससे माना गया कि गहलोत के इशारे पर ही विधायक यह सब कर रहे हैं। 

 



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