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खरी-खरी

राकेश कायस्थ।नेताओं के बयान अक्सर तोड़े-मरोड़े जाते हैं। नेता तो बेचारे निर्मल ह्रदय होते हैं। दुष्ट मीडिया बात को घुमा देता है और भोली जनता कुछ और समझ बैठती है। बढ़ रही...
Oct 10, 2017

राकेश दुबे।इस साल मौसम की मिजाज कुछ ज्यादा ही बिगड़े दिखे। हार्वी और इरमा तूफानों ने टैक्सस समेत दक्षिणी राज्यों को प्रभावित किया। वहीं भारतीय उपमहाद्वीप में अतिवृष्टि और बाढ़ ने उत्तरी...
Oct 03, 2017

राकेश दुबे।आधे से ज्यादा भारत रावण के पुतले बनाने में व्यस्त हैं। रावण के पुतले की ऊंचाई को विशेषता मानते हुए कुछ संगठन तो इस बात की बकायदा घोषणा करने में लगे...
Sep 27, 2017

राकेश दुबे।नई शब्दावली गढ़ने और नये प्रयोग करने में भाजपा सिद्धहस्त होती जा रही है। पिछले तीन साल के कामकाज और नई दिल्ली के ताल कटोरा स्टेडियम में सपन्न विस्तारित कार्यसमिति को...
Sep 27, 2017

संजय शेफर्ड। जिन्दगी की जद्दोजहद में भी ईमानदार कोशिश और बेईमान भरम में बारीक सा फ़र्क होता है। और यही फ़र्क आगे चलकर डिफरेंट पैदा करता है।  मामला सिर्फ बनारस की लड़कियों का...
Sep 25, 2017

पुण्य प्रसून बाजपेयी। फिलहाल सबसे बड़ी चुनौति इकानामी की है और बिगड़ी इकनॉमी को कैसे नये आयाम दिये जायें जिससे राजनीतिक लाभ भी मिले अब नजर इसी बात पर है। एक तरफ नीति आयोग...
Sep 22, 2017

पुण्य प्रसून बाजपेयी। एक तरफ हनीप्रीत का जादू तो दूसरी तरफ मोदी सरकार की चकाचौंध। एक तरफ बिना जानकारी किस्सागोई, दूसरी तरफ सारे तथ्यो की मौजूदगी में खामोशी। एक तरफ हनीप्रीत को कटघरे तक...
Sep 19, 2017

आशीष सागर। तस्वीर में कौन है ये नाम बतलाने की आवश्यकता नहीं है....सामाजिक मुद्दों पर जो भी थोड़ी बहुत ग्लोबल / भारतीय जानकारी रखता होगा इस .....फुटपाथी समूह में बैठे नीली टी शर्ट के...
Sep 16, 2017

पुण्य प्रसून बाजपेयी।रोजगार ना होने का संकट या बेरोजगारी की त्रासदी से जूझते देश का असल संकट ये भी है कि केन्द्र और राज्य सरकारों ने स्वीकृत पदों पर भी नियुक्तियां नहीं की है।...
Sep 15, 2017

अनिल कुमार पाण्डेय।हिन्दी हैं हम, वतन है हिन्दोस्तां हमारा”... ये पंक्तियां प्रसिद्ध साहित्यकार अल्लामा इक़बाल की उर्दू में लिखी गई ख़्यातनाम गज़ल “सारे जहाँ से अच्छा हिन्दोस्तां हमारा” की है जो आजादी के समर के...
Sep 14, 2017