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वीथिका

ऋचा अनुरागी। बच्चे स्विमिंग पूलों के घेरे में बंधे हुये जल में तैरना सीखते हैं,पर पापा को तो बिफरी हुई नर्मदा की कल-कल करती...
May 03, 2016

श्रीश पांडे। बड़े सौकाउं पनवाड़ी मित्र प्यारे से कैन लगे कि सिंहस्थ मेला चलने का? हम-तुम सोई नहा-धो के दान-पुण्य कर आइये। काय से...
Apr 29, 2016

ऋचा अनुरागी। दो दिनों से बुखार और थ्रोड़ इनफेक्शन से पीडित हूँ और माँ-पापा बहुत याद आ रहे हैं । बचपन में जो कभी...
Apr 26, 2016

स्वराज्य प्रसाद त्रिवेदी। भारतीय संस्कृति की अनेक विशिष्टताओं में प्रकृति के प्रति सम्मानीय और पवित्र भावना एक विशिष्ट गुण के रूप में मूल्यांकित होती आयी है। पर्वत, वन, नदियाँ- ये सब भारतीय जन-जीवन से अत्यंत...
Apr 25, 2016

सन्तोष मिश्र। समुद्र-मंथन की कथा से हमारा और हमारी स्मृति का परिचय बहुत पुराना है। भक्त कवियों, तांत्रिकों और तमाम सारे साहित्य में देह को कुम्भ कहा गया है। हमारी ज्ञान-परम्परा समुद्र का मंथन...
Apr 24, 2016

श्रीश पांडे। बेजा पर रई गर्मी में पनवाड़ी गमछा बांध्ो पान की दुकान में बैठे चिंतन कर रये हते कि का हुइए आसौं... काय...
Apr 21, 2016

ऋचा अनुरागी। मैं अनेकों रंग-रूपों में उन्हें देखती हूँ,पर जितना देखती हूँ वे उससे कहीं हजार गुना अधिक रंग-रूपों में परिलक्षित होते नज़र आते...
Apr 19, 2016

डॉ.प्रकाश हिंदुस्तानी। डॉ. वेदप्रताप वैदिक पत्रकार, वक्ता और शोधार्थी के रूप में जाने जाते हैं। उन्होंने हिन्दी को उचित सम्मान देने के लिए भी...
Apr 17, 2016

डॉ.प्रकाश हिंदुस्तानी। अगर फिरदौस बर रूए ज़मीनस्त, हमींनस्त-ओ, हमींनस्त-ओ, हमींनस्त’’ (यदि पृथ्वी पर कहीं स्वर्ग है, तो वह यहीं है, यहीं है, यहीं है) श्रीनगर का नाम लेते ही डल झील...
Apr 13, 2016

ऋचा अनुरागी। अगर जीवन में किसी से कोई चीज़ दुबारा मांगने को कहा जाये तो वह हर-हाल में अपना बचपन दुबारा चाहेगा। जगजीत सिंह...
Apr 12, 2016